Thursday, August 26, 2010

The reality of vegetarianism.बेज़ुबान पेड़ों के मासूम भ्रूण को खाने वालो को दयालू कहा जाएगा या निर्दयी ?- Ayaz Ahmad

महक भाई जो प्रश्न आपने उठाए हैं उनका जवाब तो आपकी पोस्ट पर ही अलग अलग कई विद्वान दे चुके हैं लेकिन जब आपको समझना ही नही है तो कोई आपको समझा कैसे सकता है । * हमें आपके आहार पर कोई आपत्ति नही है लेकिन आप हमारे आहार पर ऐतराज़ जताते हुए हमें पापी घोषित कर चुके है और चाहते है कि मांसाहार करने के बदले मे हमें मृत्यु दंड दे दिया जाए ये आपका निजी विचार है जो की ग़लत है और इससे सभी शाकाहारी भी सहमत नही हैं । **हमारा सवाल तो यह है कि बकरा हो या आलू टमाटर जब दोनो ही जीवधारी हैं तो फिर ज़्यादा निरीह तो यह सब्जियाँ हैं जो मरते समय शोर पुकार फ़रियाद भी नही कर सकती इन सब्जियों की हत्या करने का अधिकार आप किस तर्क से पा सकते है ।
*** पेड़ों मे भी नर मादा होते है फूल फ़र्टिलाइज़ेशन के बाद फल बन जाता है बाज़ार मे जो फल आते हैं वह पेड़ द्वारा त्यागे नही होते ब्लकि उन्हे पेड़ से तोड़ा गया होता है पेड़ के लिए फल ठीक ऐसा ही है जैसा कि गर्भवती औरत के लिए उसका भ्रूण यदि आप मनुष्य का भ्रूण नही खा सकते तो फिर आप फल खाने के लिए क्या तर्क पेश करेंगे ।
**** मनुष्य को खाने के लिए अंतरिक्ष से किसी प्राणी के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नही है अरबो खरबोँ पैरासाइट और बैक्ट्रीया मनुष्य के जिस्म में कालोनी बनाकर बसे हुए हैं । यह दुनिया ऐसी ही है हम जीवों का आहार करते हैं और जीव हमारा ।
***** मनुष्य के मरने के बाद जो लोग चिता जलाते हैं वे मृत शरीर में आबाद असंख्य जीवों की हत्या करते है ।
****** चिता जलाने से वन कटते हैं और ग्लोबल वार्मिँगं बढ़ता है ग्लोबल वार्मिगं के बारे में चिंतित बुद्धिजीवियों को इसका विरोध करना चाहिए हम तो किसी की धार्मिक परंपरा पर आपत्ति न पहले करते थे न अब करते हैं । अलबत्ता इस्लाम के साइंटिस्ट दृष्टिकोण की आलोचना करने वालो को जवाब देना ज़रूरी होता है तो मजबूरन इतना लिखना पड़ा आशा है कि स्वस्थ संवाद की परंपरा का निर्वाह करेंगे ।

Wednesday, August 25, 2010

Jain opinion about man's food. क्या भोजन के संबंध मे जैन विचार व्यवहारिक और आदर्श है ? Ayaz Ahmad


सुज्ञ जी ! जैन दर्शन का आदर्श आचरण जैन साधु है जो न तो टूथब्रश करते है और न साबुन से नहाते है, अपने बाल अपने हाथों से फाड़ते ताकि जीव हत्या न हो । भिक्षा माँगकर खाते हैं 24 घंटे मे सिर्फ एक बार वह भी खड़े खड़े हथेली पर लेकर जो मात्र दो ग्रास होता है ।
संक्षेप मे यह है जैन साधुओ का आहार संबंधी आचरण । यह न तो शरीर की आवश्यकता को पूरा करता है और न इसे संतुलित और पोष्टिक आहार कहा जा सकता है जिसे मनुष्य के लिए साइंटिस्ट ज़रूरी बताते है । ऐसे आहार से मनुष्य की काया जर्जर होती चली जाती है ऐसा आहार शरीर को पुष्ठ नही नष्ट करता है ।
1. क्या आप चाहते है कि सभी भारतीय ऐसा आहार ग्रहण करें और कमजोर हो जाए और शत्रु देश के लोग आ दबाएं ?
2.क्या विश्व मे सभी के लिए यह व्यवस्था व्यवहारिक और आदर्श है ?
3.सुज्ञ जी ! क्या आप स्वयं भी भोजन संबंधी इस जैन विचार के अनुसार ही खाते पीते है ?

Tuesday, August 24, 2010

What should be man's food ? शाकाहार के लिए जीव हत्या क्यो ? Ayaz Ahmad

sugh जी शाकाहार के लिए खेतों मे उपजाए अन्न के लिए क्या जीवों की हत्या करना ठीक है या गलत ? खेतों बीज डालने से लेकर फसल काटने तक कितने जीवों की हत्या होती है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है । खेतों मे जब हल चलाया जाता है कितने जीव मरते है, उसके बाद कीटनाशक के प्रयोग से कितने जीवों को मार दिया जाता है फसलो को बचाने के नाम पर कितनी नीलगाय मार दी जाती है या क्रूरता से घायल कर दी जाती है । क्या इन सब संसाधनों पर इन जीवों का भी हक नही है फिर इन्हे अधिकार के बजाए अकाल मौत क्यो मिलती है? गाय के दूध पर किसका अधिकार है ? एक माँ के दूध पर उसके बच्चे का अधिकार होता है या किसी और का ?फिर शाकाहार के नाम पर मनुष्य उस बच्चे के हिस्सा पी जाता है क्या यह जीवों के प्रति हिंसा नही है ? माँ के दूध के अभाव मे जैसे मनुष्य का बच्चा बीमार होकर कमज़ोर हो जाता है और सारी उम्र पनप नही पाता क्या पशुओं के बच्चों के साथ यह स्थिति नही होती ? फिर शाकाहार के नाम पर यह दोहरा पैमाना क्यों ? आप क्यो उन बछड़ोँ के लिए संघर्ष नही करते और उन दूसरे जीवों के लिए संघर्ष नही करते जो खेती के नाम पर मार दिए जाते है और जो फसलों को बोनेँ और ढोने मे पशुओं का प्रयोग किया जाता है क्या वह उनके प्रति हिंसा नही है ? शाकाहार के लिए मारे जाने वाले जीवों के न्यूनतम पैमाना क्या होना चाहिए और इनकी हत्या कम हो इसकी विधि क्या होनी चाहिए ? ये की समस्या पूरे विश्व की है इसलिए इसका हल भी ऐसा होना चाहिए जो पूरे विश्व पर लागू हो सके ऐसा हल न हो जो सिर्फ मैदानों मे लागू हो सके और पहाड़ी स्थानों पर लागू न किया जा सके ।

Saturday, August 14, 2010

Mahatma Gandhi का संदेश, इस्लाम का अध्ययन करें प्रेम बढ़ेगा । AYAZ AHMAD


"इस्लाम अपने अत्यंत विस्तार काल मे भी अनुदार नही था, ब्लकि सारा संसार उसकी प्रशंसा कर रहा था । उस समय जबकि पश्चिमी दुनिया अंधकारमय थी, पूर्व क्षितिज मे एक उज्जवल सितारा चमका, जिससे विकल संसार को प्रकाश और शांति प्राप्त हुई ।इस्लाम झूठा मज़हब नही है , हिंदुओ को भी इसका उसी तरह अध्ययन करना चाहिए, जिस तरह मैने किया है । फिर वे भी मेरे ही समान इससे प्रेम करने लगेंगे ।" "मुझसे किसी ने कहा था कि दक्षिण अफ्रीका मे जो युरोपियन आबाद है, वे इस्लाम के प्रचार से कांप रहे है, उसी इस्लाम से जिसने मोरक्को में रोशनी फैलाई और संसारवासियोँ को भाई भाई बन जाने का सुख संवाद सुनाया । ऐसा हो सकता है ? वे डरते होंगे तो इस बात से कि अगर अफ्रीका के आदिवासियों ने इस्लाम कबूल कर लिया तो वे गोरोँ से बराबर का अधिकार माँगने लगेंगे । आप उनको डरने दीजिए। अगर कोई भाई भाई बनना पाप है, अगर वे इस बात से परेशान हैं कि उनका वांशिक बड़प्पन कायम न रह सकेगा तो उनका डरना उचित है, क्योकि मैने देखा है कि जूलो ईसाई हो जाता है तो वह सफेद रंग के ईसाइयों के बराबर नही हो पाता, किंतु जैसे ही वह इस्लाम धर्म ग्रहण करता है, बिल्कुल उसी वक्त वह उसी प्याले मे पानी पीता है, जिसमे कोई और मुसलमान पानी पीता और खाना खाता है । सही है यूरोपियन का काँपना ।"

Tuesday, August 10, 2010

The Soldier जाँबाज़ोँ को क्या मिलता है देश की सरकार से,बता रहे हैं सलमान खान -Ayaz Ahmad

बालीवुड में अपनी आक्रामक छवि के लिए मशहूर अभिनेता सलमान खान देश के मौजूदा हालात से नाराज़ है । नाराज़गी उन्होने टिवटर पर जाहिर की है । सलमान ने प्रश्न किया है " भारत क्या है....एक ऐसा देश, जहाँ पुलिस और एंबुलेँस से पहले पिज्जा घर पर पहुँच जाता है। यहाँ कार लोन मात्र पाँच फीसदी पर मिलता है, लेकिन पढ़ाई के लिए आपको 12% ब्याज चुकाना पड़ता है ।' सलमान ने टवीट किया है , भारत में चावल चालीस रुपए किलो मिलता है जबकि सिमकार्ड मुफ्त । यहाँ लोग देवी दुर्गा की पूजा करते है, लेकिन बेटियों की हत्या भी करते हैं।
ओलंपिक खेलों में निशानेबाज़ स्वर्ण पदक जीतते है तो सरकार उन्हे तीन करोड़ रुपए देती है , लेकिन एक और निशानेबाज़ (सुरक्षाबल) आतंकियोंसे लड़ते हुए शहीद होते है तो सरकार उन्हे एक लाख रुपए देती है । वास्तव में भारत अतुल्य है।'..... सलमान खान ने भारत की दशा का चित्रण कर दिया है । अब ब्लागर्स से सुझाव आमंत्रित है कि इस दुर्दशा से भारत को कैसे निकाला जाए ।

Monday, August 2, 2010

बाबरी मस्जिद या राम मंदिर : बौद्धिक दृष्टि में DR.AYAZ AHMAD

रामचंद्र जी एक राजा थे उन्होने शासन किया और चले गए । बाबर एक बादशाह था उसने शासन किया और चला गया । हकनामा की बाबरी मस्जिद से संबंधित पोस्ट पर चल रही बहस पढ़ कर मन मे एक सवाल उठा वह मैं ब्लाग जगत के सभी बुद्धिजीवियों के सामने रख रहा हूँ । बाबर इस देश मे आक्रमणकारी के तौर पर आया वह कब आया और कब तक उसने शासन किया और कब उसकी मृत्यु हुई यह सब ऐतिहासिक तथ्य मैं भी जानता हूँ और आप सब बुद्धिजीवी भी जानते ही होंगे लेकिन श्रीरामचंद्र जी कब पैदा हुए और कब से कब तक उन्होने शासन किया और कब उनकी मृत्यु हुई ये मैं नही जानता मगर यहाँ पर कुछ बुद्धिजीवी ऐसे मौजूद है जो यह भी जानते है कि अयोध्या मे रामचंद्र जी किस जगह पैदा हुए इसलिए वह ऊपर दिए गए सवालो के जवाब भी जानते होंगे । भारत एक धर्म प्रधान देश है धर्म और न्याय एक दूसरे के पूरक है धर्म ही सही न्याय कर सकता है इसलिए सभी न्याय पूर्वक विचार करें । और उपरोक्त सवालो के जवाब दें

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...