Monday, July 19, 2010

मेरा भाई शाहनवाज़- डॉ. अयाज़ अहमद


आज १९ जुलाई है आज मेरी ज़िन्दगी का वह दिन है जो मुझे हमेशा याद रहेगा आज ही के दिन मेरा प्यारा भाई शाहनवाज़ अहमद मुझसे हमेशा के लिए जुदा हो गया था एक साल गुज़रने के बाद और उसका होना जैसे कल ही की बात लगती है . इस एक साल का कोई एक दिन कोई पल ऐसा नहीं गुज़रा जिसमे मैंने उसे याद न किया हो. भी वह अपनी यादों के साथ मेरे दिल के करीब है. हर आदमी की अच्छाइयां ही उसकी यादों के साथ आती है और शाहनवाज़ मे तो बहुत सारी अच्छाइयां थी जो मुझे उसे भूलने नहीं देती और रह रह उसकी याद आती रहती है .हम कुल सात भाई बहन थे जिसमे से दो हम यानि एक मै और दूसरा शाहनवाज़ था और बाकी पांच बहने है ज़िन्दगी बहुत हंसी ख़ुशी के साथ गुज़र रही थी लगता था की ज़िन्दगी बड़ी आसान है कयोंकि मेरी सारी मुश्किलात का हल तो शाहनवाज़ था उसके शब्दकोष मे मेरे काम के लिए न नाम का कोई शब्द नहीं था वोह मुझसे तकरीबन १० साल छोटा था मगर घर या क्लिनिक का कोई भी काम हो ही नहीं सकता था उसकी उम्र तकरीबन २० साल थी लेकिन इस छोटी उम्र मे वह बड़े काम आसानी से कर लेता थामरीजों की खिदमत और दीन की दावत उसका शोक था हर साल देवबंद में लगने वाले मेले मे एकता प्रदर्शनी मे ज़ोर शोर से हिस्सा लेता था लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है ब्लॉगजगत मे अपने सभी साथियों से गुज़ारिश है की आप लोग शाहनवाज़ की मग्फ़िरत के लिए और घरवालो को सब्र के लिए दुआ करे

15 comments:

Ayaz ahmad said...

ज़िन्दगी बहुत हंसी ख़ुशी के साथ गुज़र रही थी लगता था की ज़िन्दगी बड़ी आसान है कयोंकि मेरी सारी मुश्किलात का हल तो शाहनवाज़ था

हमारीवाणी said...

हिंदी ब्लॉग लेखकों के लिए खुशखबरी -


"हमारीवाणी.कॉम" का घूँघट उठ चूका है और इसके साथ ही अस्थाई feed cluster संकलक को बंद कर दिया गया है. हमारीवाणी.कॉम पर कुछ तकनीकी कार्य अभी भी चल रहे हैं, इसलिए अभी इसके पूरे फीचर्स उपलब्ध नहीं है, आशा है यह भी जल्द पूरे कर लिए जाएँगे.

पिछले 10-12 दिनों से जिन लोगो की ID बनाई गई थी वह अपनी प्रोफाइल में लोगिन कर के संशोधन कर सकते हैं. कुछ प्रोफाइल के फोटो हमारीवाणी टीम ने अपलोड.......

अधिक पढने के लिए चटका (click) लगाएं




हमारीवाणी.कॉम

Anonymous said...

inna lillah hi wa inna ilaihi rajiun


A true story of little girl Br'aah

http://towardshuda.wordpress.com/2010/02/18/a-true-story-a-little-girl-named-braah/

lets dua for all muslims who are not in this world now

Saleem Khan said...

ALLAH ham sabko mushkilon men sabr dene kii taufeeq ata farmaaye...

Taarkeshwar Giri said...

Himmat Se kam Le . Sab Prabhu Ki maya hai

Aslam Qasmi said...

ham aap ke gham men barabar ke shareek hen

DR. ANWER JAMAL said...

शाहनवाज़ भाई तो डाक्टर साहब का था लेकिन वह हमारा भी बाज़ू था। बाला सुंदरी के मेले में इस्लामी साहित्य का स्टाल हम उसी के सहारे लगाया करते थे। इस साल वह नहीं था सो स्टाल भी नहीं लगा। वह गोरे रंग का पतला दुबला और बहुत कम बोलने वाला और सदा अपने बड़े भाई और वालिदैन की बात मानने वाला एक नौजवान लड़का था। हमें उसके जाने के बाद उसकी खूबियों का अहसास ज़्यादा हुआ और हो रहा है।
ज़िंदगी मिलती भी है और गुज़र भी जाती है। आज हम ज़िंदा हैं लेकिन क्या वाक़ई हम अपनी ज़िंदगी की क़द्र कर रहे हैं ?
हमारे भाई बहन मां बाप और रिश्तेदार जो ज़िंदा हैं उनके साथ हम कितना समय बिताते हैं ?
काश! हम ज़िंदगी की क़द्र करना सीख जाएं और इसे इस तरह गुज़ारें कि हम मालिक के मुजरिम बनकर उसके पास न पहुंचें।
काश! हम सब्र और शुक्र को अपना लें जिसकी मिसाल शाहनवाज़ के वालिदैन की ज़िंदगी में देखी जा सकती है।
अल्लाह तआला शाहनवाज़ की मग़फ़िरत फ़रमाये और उसे अपने क़ुर्ब में आला मक़ाम अता फ़रमाये।
आमीन । जो लोग कर सकते हैं वे उसे ईसाले सवाब ज़रूर करें।

सहसपुरिया said...

अल्लाह तआला शाहनवाज़ की मग़फ़िरत फ़रमाये (आमीन )

सहसपुरिया said...

अल्लाह आप को और आपके घरवालो को सब्र और अज्र दे.(आमीन )

Mahak said...

@अयाज़ भाई ,

कहते हैं खुशियाँ बांटने से बढती हैं और गम बांटने से कम होता है ,हम तो सिर्फ कोशिश कर सकते हैं आपके दुःख में शामिल होने की लेकिन इसका असली दर्द तो आप ही जानते हैं लेकिन ब्लॉग्गिंग की मदद से आपका दुःख अब हमारा भी दुःख है
मेरी संवेदनाएं आपके साथ हैं

महक

The Straight path said...

अल्लाह तआला शाहनवाज़ की मग़फ़िरत फ़रमाये (आमीन )

HAKEEM SAUD ANWAR KHAN said...

अल्लाह तआला शाहनवाज़ की मग़फ़िरत फ़रमाये (आमीन )

Sharif Khan said...

अल्लाह मरहूम की मग्फ़िरत फरमाए. आमीन.

सफ़ेद कपड़े पहनाकर यदि कुछ लोगों को कोयलों की कोठरी में से होकर गुज़ारने के बाद उनका अवलोकन करें तो हम देखेंगे कि किसी व्यक्ति के कपड़ों पर कम दाग़ होंगे, किसी के कपडों पर अधिक होंगे, कुछ के कपड़े ऐसे होंगे कि रंग का पता ही न चलेगा और उनमें जो उत्तम श्रेणी के लोग होंगे उनके कपड़ों पर कोई दाग़ न होगा और वही कामयाब कहलाने के हक़दार होंगे। इन्हीं सब बातों को ध्यान नें रखते हुए हमको अपने जीवन का मक़सद समझना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि इस दुनिया से विदा होते समय हमारा दामन दाग़दार न हो।

http://haqnama.blogspot.com/2010/07/sharif-khan.html

Urmi said...

हम आपके गम को महसूस कर सकते हैं! अल्लाह से दुआ करते हैं की आपको हिम्मत दें!

Anonymous said...

सेहत के लिए फायदेमंद है रोजा
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एकम् ब्रह्म द्वितीयो नास्ति , नेह , ना , नास्ति किंचन ।
अर्थात ब्रह्म एक है दूसरा नहीं है, नहीं है, नहीं है, किंचित भी नहीं है।

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