Sunday, June 13, 2010

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।
Greatest concern of Islam is Allah
खुद को जांचिये कि क्या आपका सुप्रीम कन्सर्न अल्लाह है ?
मौलाना ने यह भी बताया कि मेरी दरयाफ़्त ‘इज्ज़‘ है। जब तक आप अपने इज्ज़ को दरयाफ़्त न कर लें तब तक आप न तो आला दर्जे की दुआ कर सकते हैं और न ही आला दर्जे की इबादत कर सकते हैं।इज्ज़ एक गुण है जो घमण्ड का विलोम है।हक़ीक़त तो यही है कि आदमी को चाहिये कि वह अपने आपको जांचता परखता रहे ताकि बेहतरी की तरफ़ उसका सफ़र जारी रह सके।

4 comments:

सतीश सक्सेना said...

मौलाना का कहना बिलकुल सच है जब तक आपके अन्दर घमंड है तब तक भूल जाइए कि आपकी तकलीफ की सुनवाई होगी , या आपकी दुआ में कोई भी असर होगा, हर बार सर झुकाने से पहले सोंच लें कि उसे आपके बारे में सब पता है ...फिर इबादत करें ...
सादर

सतीश सक्सेना said...

कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें इससे टिप्पणी करने में बहुत असुविधा होती है और इससे फायदा कुछ नहीं !

Voice Of The People said...

मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।और मोमिन की पहचान यह है की वोह अमाल भी करता है अल्लाह के बनाए कानून पे. काश कर मुसलमान मोमिन हो जाता?

Sharif Khan said...

आप ने अपनी ब्लॉगर्स बिरादरी में मुझ नाचीज़ को अपने क़ीमती अलफ़ाज़ से नवाज़ कर जो हौसलाअफ़ज़ाई की है उसका मैं तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूं। ब्लॉग को हम बाहमी राब्ते का ज़रिया बनाने के साथ तख़रीबकारी से बचते हुए तामीरी काम में इस्तेमाल करें तो सही हक़ अदा कर सकेंगे।
shareeefkhan@gmail.com

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