Skip to main content

सुरेंदर शर्मा अज्ञात मशहूर किताबें

सरिता व मुक्‍ता इस की संबंधित पत्रिकाओं में समय समय पर हिंदू समाज, प्राचीन भारतीय संसकृति, आर्थिक, सामाजिक तथा पारिवारिक समस्याओं पर प्रकाशित विचारणीय लेखों के रिप्रिंट अब 12 सैटों में उपलब्ध, हर सेट में लगभग 25 लेखपुस्तकः हिंदू समाज के पथभ्रष्टक तुलसीदासहिंदू समाज को पथभ्रष्ट करने वाले इस संत कवि के साहित्यिक आडंबरों की पोल खोलकर उस की वास्तविकता उजागर करना ही इस पुस्तक का उददेश्य हैपुस्तक, रामायणः एक नया दृष्टिकोणप्रचलित लोक धारणा के विपरीत कोई धर्म ग्रंथ न होकर एक साहित्यिक रचना है, इसी तथ्य को आधार मानते हूए रामायण के प्रमुख पात्रों, घटनाओं के बारे में अपना चिंतन प्रस्तुत किया है, रामायण की वास्तविकता को समझने के लिए विशेष पुस्तकपुस्तकः हिंदू इतिहासः हारों की दास्तानप्रचलित लोक धारणा के विपरीत कोई धर्म ग्रंथ न होकर एक साहित्यिक रचना है, इसी तथ्य को आधार मानते हुए रामायण के प्रमुख पात्रों, घटनाओं के बारे में अपना चिंतन प्रस्तुत किया है रामायण की वास्तविकता को समझने के लिए विशेष पुस्तकपुस्तकः क्या बालू की भीत पर खडा है हिंदू धर्म?862 पृष्ठ मूल्य 175 रूपयेपुस्तकः कितने अप्रासंगिक हैं धर्म ग्रंथलेखक राकेशनाथ336 पृष्ठ मूल्य 70 रूपयपुस्तकः हिंदू संस्‍कृतिः हिन्‍दुओं का सामाजिक विषटनपुस्तकः कितना महंगा धर्मEnglish book:The Ramayana : A new Point of viewHindu: A wounded societyThe history of Hindus: the Saga of defeatsA study of the ethics of the banishment of SitaTulsidas: Misguider of Hindu societyThe Vedas; the quintessence of Vedic AnthologiesIndia: what can it teach us!God is my एनेमीमिलने के पतेदिल्ली बुक क.एम 12, कनाट सरकस, नई दिल्ली . 110001दिल्ली प्रेसई. 3, झंडेवाला, नई दिल्ली . 11..55फैक्स न . 51540714, 23625020503ए नारायण चैंबर्स, आश्रम रोड, अहमदाबाद - 380009जी 3, निचली मन्जिल, एच.वी.एस. कोर्ट, 21 कनिंघम रोड, बेंगलूर 56005279ए, मित्तल चैंबर्स, नरीमन पाइंट, मुम्बई 400021पोददार पाइंट, तीसरी मंजिल, 113 पार्क स्टीट, कोलकाता 700016जी 7, पायनियर टावर्स, मेरीन डाइव, कोच्चि 682031बी. जी 3,4 , सप्रू मार्ग, लखनउ 22600114, पहली मंजिल, सीसंस कांप्लैक्स, मांटीअथ रोड, चेन्नई 600008111, आशियाना टावर्स, ऐगिजबिशन रोड, पटना 800001122, चिनौय टेड सेंटर, 116, पार्क लेन, सिकंदराबाद 500003

Comments

Popular posts from this blog

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

शुक्राणुहीनता NIL SPERM

शुक्राणु की कमी के कारण और निवारण आदमी दिखनें में तन्दरुस्त हो ताकतवर हो लेकिन उसके शुक्राणु अगर दुर्बल हैं तो वो गर्भ धारण नहीं करवा सकते - तो जानें वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं को बढ़ाने के चंद तरीके - पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं - वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु की कमी को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं लेकिन अगर वीर्य में शुक्राणुओं की मौजूदगी ही नहीं है तो इसे एज़ूस्पर्मिया संज्ञा दी जाती है ऐसे पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की तादाद कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं-- * वीर्य का दूषित होना * अंडकोष पर गरमी के कारण वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है। ज्यादा तंग अन्डर वियर पहिनने,गरम पानी से स्नान करने, बहुत देर तक गरम पानी के टब में बैठने और मोटापा होने से शुक्राणु अल्पता हो जाती है। * हस्तमैथुन से बार बार वीर्य स्खलित करना * थौडी अवधि में कई बार स्त्री समागम करना * अधिक शारीरिक और मानसिक …