Thursday, December 9, 2010

darululoom deobandदारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान chanceller

विश्व विख्यात दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान का बुधवार को बिजनौर में इंतकाल हो गया। वह 96 वर्ष के थे। देर शाम उन्हें देवबंद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद हजारों लोग उनके घर पर अफसोस जाहिर करने पहुंचे।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव समेत कई नामचीन हस्तियों ने मौलाना साहब के निधन पर खिराजे अकीदत पेश की। मौलाना मरगूबुर्रहमान को 1982 में दारुल उलूम का मोहतमिम चुना गया था। उस वक्त दारुल उलूम विभाजन के तूफानी दौर से गुजर रहा था, लेकिन मौलाना अपनी ईमानदारी और सलाहियत से कश्ती को किनारे पर ले आए।
जमींदार घराने से ताल्लुक रखने वाले मौलाना बिना तनख्वाह दारुल उलूम की खिदमत करते रहे। उनके कार्यकाल में दारुल उलूम देवबंद ने नए आयाम स्थापित किए। मौलाना साहब ने मुस्लिम समाज में लड़कियों की तालीम पर खास अभियान चलाया। साथ ही मुगलकाल के बाद उन्होंने पत्थर की शानदार मस्जिद रशीद की तामीर कराई, जो दुनिया की खूबसूरत मस्जिदों में शुमार की जाती है।
मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान के जनाजे की नमाज दारुल उलूम के अहता-ए-मौलसरी में अदा की गई। जिसमें हजारों लोगों ने शिरकत कर मोहतमिम साहब का अंतिम विदाई दी। उनके शव को मजारे कासमी में सुपुर्द ए-खाक किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में दारुल उलूम वक्फ के नायब मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मदरसा जामिया इमाम मुहम्मद अनवर शाह के मोहतमिम मौलाना अहमद खिंजर शाह मसूदी, जमीयत उलेमा हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी मुहम्मद उस्मान, राज्यसभा सांसद व जमीयत प्रमुख मौलाना महमूद मदनी, पालिकाध्यक्ष मुहम्मद हसीब सिद्दीकी, मुस्लिम फंड ट्रस्ट के उप प्रबंधक हाजी नवाब मुजफ्फर उस्मानी, सपा नगर अध्यक्ष असद जमाल फैजी, सपा प्रदेश सचिव माविया अली, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राणा, अरबी विद्वान एवं लेखक मौलाना नदीमुलवाजदी, विख्यात शायर डा. नवाज देवबंदी, प्रशासक डा. अख्तर सईद, इस्लामिया डिग्री कालेज के प्रबंधक डा. अजीमुलहक, सपा नेता दिलशाद गौड़, इस्लामिक विद्वान मौलाना अरशद फारुकी, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य मौलाना इस्लाम कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मनरेगा के प्रदेश सचिव शाद फैजान सिद्दीकी, विधायक इमरान मसूद, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राणा, जिलाधिकारी आलोक कुमार व एसएसपी विनोद दोहरे शामिल रहे। इस दौरान मेरठ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता से बड़ी संख्या में उलेमा भी शामिल रहे.

Saturday, September 4, 2010

Charity ईद की नमाज़ से पहले अदा करना चाहिए फ़ितरा Ayaz Ahmad

रमज़ानुल मुबारक का महीना अल्लाह की ईबादत (उपासना) और इताअत (समर्पण) का महीना है इस महीने मे हर अमल (अच्छे काम) पर सवाब (पुण्य) बढ़ा दिया जाता है ।रोज़े का बदला अल्लाह खुद इनायत करता है । रोज़ेदार कितनी भी एहतयात करें तब भी कुछ छोटी मोटी गलतियाँ हो ही जाती है जैसे लड़ाई, झगड़ा, झूठ, एक दूसरे की बुराई । इस तरह की बुराइयों से हमेशा पूरी तरह बचा नही जा सकता । इसी तरह की गलतियों की तलाफ़ी के लिए सदकातुलफ़ितर (दान) को वाजिब (ज़रूरी) करार दिया गया है। फ़ितरा रोज़ो की ज़कात है जो सब मुसलमानों बालिग़, नाबालिग़ मर्द औरत पर लाज़िम है । नबी करीम स.अ.व. ने फ़ितरा को ज़रूरी करार दिया जो रोज़ेदारो के लिए बुरी और बेहयाई की बातों से पाकीज़गी (पवित्र ) होने का ज़रिया है और गरीबों और मिस्कीनोँ के लिए खाने का इंतज़ाम है जो आदमी फ़ितरा को ईद की नमाज़ से पहले अदा करता है तो यह मक़बूल ज़कात होगी और अगर कोई आदमी इसे नमाज़ के बाद अदा करता है तो यह आम सदक़ा (दान) होगा । सदक़ा तुल फ़ितर वाजिब (अनिवार्य) करने के दो मकसद है एक रोज़ेदारो की गलतियों की तलाफ़ी और दूसरा गरीबों के लिए ईद के दिन खाने का इंतज़ाम ताकि गरीब भी ईद के दिन लोगों के साथ खुशियों मे शरीक हो सके । सदक़ा तुल फ़ितर का हदीस में गेहूँ का निसाब 1 किलो 633 ग्राम है जबकि जौ और छुवारे का निसाब एक आदमी का तकरीबन 3 किलो 266 ग्राम निकलता है जिसमे जौ के हिसाब से एक आदमी के 40 रुपए और छुवारे के हिसाब से एक आदमी के 115 रुपए बनते है और गेहूँ के हिसाब से 21 रुपए बनते है सदक़ा तुल फ़ितर गेहूँ या उसके पैसे देने से भी अदा हो जाता है लेकिन बेहतर यह है कि ज़्यादा से ज़्यादा फ़ितरा दे ताकि गरीबों का फ़ाएदा हो।

Wednesday, September 1, 2010

Balanced diet for Indian soldiers. अँडा खाओ देश बचाओ Ayaz Ahmad


सैनिकों के राशन पर सीएजी की फटकार का असर नज़र आने लगा है । रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों की सेहत की सुध लेते हुए उनके आहार को और पौष्टिक बनाने का फैसला किया है ।इस कवायद में फील्ड और पीस एरिया में तैनात जवानों को जहाँ अब हर दिन दो अंडे दिए जाएँगे ।वहीं नौ हज़ार फुट और उससे अधिक ऊँचाई पर तैनात जवानों को दिन में एक के बजाए दो अंडे मिलेंगे । (दैनिक जागरण 31 अगस्त 2010)
सैनिकों की यह खुराक बड़े वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद तय की जाती है देश की रक्षा में तैनात जवानों की सेहत का पूरा ध्यान सरकार को रखना पड़ता है सिर्फ शाकाहार जवानों को संतुलित आहार प्रदान नही कर सकता क्योकि इससे शरीर मे सही मात्रा में प्रोटीन की ज़रूरत पूरी नही हो सकती । इसलिए सरकार ही का दायित्व है कि वह जवानों के संतुलित आहार का इंतजाम करे । क्योकि प्रोटीन की कमी के कारण जवानों मे कुपोषण हो सकता है और वह युद्ध के समय मे देश व सैनिकों के लिए घातक हो सकता है । अब देश के नागरिकों का भी फ़र्ज़ है वह भी देश के लिए हर परिस्थिति के लिए हर समय तैयार रहें देश के हर समय जान देने व लेने के लिए तैयार रहें । कभी ऐसी स्थिति आने पर मांसाहार न करने के कारण प्रोटीन की कमी के कारण कुपोषण से जूझते लोग क्या करेंगे ?
ऐसी स्थिति मे वह लोग पीठ दिखाने को विवश होंगे और पराजय का कारण भी बन सकते है । इसलिए हर व्यक्ति को प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित मेन्यू अपनाने की ज़रूरत है । इसके लिए लोगों को अपने काल्पनिक अंधविश्वासो को बाधा नही बनने देना चाहिए ।
कुछ लोग मांसाहार के खिलाफ दुष्प्रचार करके अपने लोगों को कमजोर बना रहें है ऐसा करके वह लोग जाने अनजाने शत्रु देश का काम आसान कर रहें है । इस को लेकर समय रहते जागने की ज़रूरत है अतः सभी को मिलकर देश को मजबूत बनाने के लिए मांसाहार को बढ़ावा देने की ज़रूरत है

Thursday, August 26, 2010

The reality of vegetarianism.बेज़ुबान पेड़ों के मासूम भ्रूण को खाने वालो को दयालू कहा जाएगा या निर्दयी ?- Ayaz Ahmad

महक भाई जो प्रश्न आपने उठाए हैं उनका जवाब तो आपकी पोस्ट पर ही अलग अलग कई विद्वान दे चुके हैं लेकिन जब आपको समझना ही नही है तो कोई आपको समझा कैसे सकता है । * हमें आपके आहार पर कोई आपत्ति नही है लेकिन आप हमारे आहार पर ऐतराज़ जताते हुए हमें पापी घोषित कर चुके है और चाहते है कि मांसाहार करने के बदले मे हमें मृत्यु दंड दे दिया जाए ये आपका निजी विचार है जो की ग़लत है और इससे सभी शाकाहारी भी सहमत नही हैं । **हमारा सवाल तो यह है कि बकरा हो या आलू टमाटर जब दोनो ही जीवधारी हैं तो फिर ज़्यादा निरीह तो यह सब्जियाँ हैं जो मरते समय शोर पुकार फ़रियाद भी नही कर सकती इन सब्जियों की हत्या करने का अधिकार आप किस तर्क से पा सकते है ।
*** पेड़ों मे भी नर मादा होते है फूल फ़र्टिलाइज़ेशन के बाद फल बन जाता है बाज़ार मे जो फल आते हैं वह पेड़ द्वारा त्यागे नही होते ब्लकि उन्हे पेड़ से तोड़ा गया होता है पेड़ के लिए फल ठीक ऐसा ही है जैसा कि गर्भवती औरत के लिए उसका भ्रूण यदि आप मनुष्य का भ्रूण नही खा सकते तो फिर आप फल खाने के लिए क्या तर्क पेश करेंगे ।
**** मनुष्य को खाने के लिए अंतरिक्ष से किसी प्राणी के आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नही है अरबो खरबोँ पैरासाइट और बैक्ट्रीया मनुष्य के जिस्म में कालोनी बनाकर बसे हुए हैं । यह दुनिया ऐसी ही है हम जीवों का आहार करते हैं और जीव हमारा ।
***** मनुष्य के मरने के बाद जो लोग चिता जलाते हैं वे मृत शरीर में आबाद असंख्य जीवों की हत्या करते है ।
****** चिता जलाने से वन कटते हैं और ग्लोबल वार्मिँगं बढ़ता है ग्लोबल वार्मिगं के बारे में चिंतित बुद्धिजीवियों को इसका विरोध करना चाहिए हम तो किसी की धार्मिक परंपरा पर आपत्ति न पहले करते थे न अब करते हैं । अलबत्ता इस्लाम के साइंटिस्ट दृष्टिकोण की आलोचना करने वालो को जवाब देना ज़रूरी होता है तो मजबूरन इतना लिखना पड़ा आशा है कि स्वस्थ संवाद की परंपरा का निर्वाह करेंगे ।

Wednesday, August 25, 2010

Jain opinion about man's food. क्या भोजन के संबंध मे जैन विचार व्यवहारिक और आदर्श है ? Ayaz Ahmad


सुज्ञ जी ! जैन दर्शन का आदर्श आचरण जैन साधु है जो न तो टूथब्रश करते है और न साबुन से नहाते है, अपने बाल अपने हाथों से फाड़ते ताकि जीव हत्या न हो । भिक्षा माँगकर खाते हैं 24 घंटे मे सिर्फ एक बार वह भी खड़े खड़े हथेली पर लेकर जो मात्र दो ग्रास होता है ।
संक्षेप मे यह है जैन साधुओ का आहार संबंधी आचरण । यह न तो शरीर की आवश्यकता को पूरा करता है और न इसे संतुलित और पोष्टिक आहार कहा जा सकता है जिसे मनुष्य के लिए साइंटिस्ट ज़रूरी बताते है । ऐसे आहार से मनुष्य की काया जर्जर होती चली जाती है ऐसा आहार शरीर को पुष्ठ नही नष्ट करता है ।
1. क्या आप चाहते है कि सभी भारतीय ऐसा आहार ग्रहण करें और कमजोर हो जाए और शत्रु देश के लोग आ दबाएं ?
2.क्या विश्व मे सभी के लिए यह व्यवस्था व्यवहारिक और आदर्श है ?
3.सुज्ञ जी ! क्या आप स्वयं भी भोजन संबंधी इस जैन विचार के अनुसार ही खाते पीते है ?

Tuesday, August 24, 2010

What should be man's food ? शाकाहार के लिए जीव हत्या क्यो ? Ayaz Ahmad

sugh जी शाकाहार के लिए खेतों मे उपजाए अन्न के लिए क्या जीवों की हत्या करना ठीक है या गलत ? खेतों बीज डालने से लेकर फसल काटने तक कितने जीवों की हत्या होती है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है । खेतों मे जब हल चलाया जाता है कितने जीव मरते है, उसके बाद कीटनाशक के प्रयोग से कितने जीवों को मार दिया जाता है फसलो को बचाने के नाम पर कितनी नीलगाय मार दी जाती है या क्रूरता से घायल कर दी जाती है । क्या इन सब संसाधनों पर इन जीवों का भी हक नही है फिर इन्हे अधिकार के बजाए अकाल मौत क्यो मिलती है? गाय के दूध पर किसका अधिकार है ? एक माँ के दूध पर उसके बच्चे का अधिकार होता है या किसी और का ?फिर शाकाहार के नाम पर मनुष्य उस बच्चे के हिस्सा पी जाता है क्या यह जीवों के प्रति हिंसा नही है ? माँ के दूध के अभाव मे जैसे मनुष्य का बच्चा बीमार होकर कमज़ोर हो जाता है और सारी उम्र पनप नही पाता क्या पशुओं के बच्चों के साथ यह स्थिति नही होती ? फिर शाकाहार के नाम पर यह दोहरा पैमाना क्यों ? आप क्यो उन बछड़ोँ के लिए संघर्ष नही करते और उन दूसरे जीवों के लिए संघर्ष नही करते जो खेती के नाम पर मार दिए जाते है और जो फसलों को बोनेँ और ढोने मे पशुओं का प्रयोग किया जाता है क्या वह उनके प्रति हिंसा नही है ? शाकाहार के लिए मारे जाने वाले जीवों के न्यूनतम पैमाना क्या होना चाहिए और इनकी हत्या कम हो इसकी विधि क्या होनी चाहिए ? ये की समस्या पूरे विश्व की है इसलिए इसका हल भी ऐसा होना चाहिए जो पूरे विश्व पर लागू हो सके ऐसा हल न हो जो सिर्फ मैदानों मे लागू हो सके और पहाड़ी स्थानों पर लागू न किया जा सके ।

Saturday, August 14, 2010

Mahatma Gandhi का संदेश, इस्लाम का अध्ययन करें प्रेम बढ़ेगा । AYAZ AHMAD


"इस्लाम अपने अत्यंत विस्तार काल मे भी अनुदार नही था, ब्लकि सारा संसार उसकी प्रशंसा कर रहा था । उस समय जबकि पश्चिमी दुनिया अंधकारमय थी, पूर्व क्षितिज मे एक उज्जवल सितारा चमका, जिससे विकल संसार को प्रकाश और शांति प्राप्त हुई ।इस्लाम झूठा मज़हब नही है , हिंदुओ को भी इसका उसी तरह अध्ययन करना चाहिए, जिस तरह मैने किया है । फिर वे भी मेरे ही समान इससे प्रेम करने लगेंगे ।" "मुझसे किसी ने कहा था कि दक्षिण अफ्रीका मे जो युरोपियन आबाद है, वे इस्लाम के प्रचार से कांप रहे है, उसी इस्लाम से जिसने मोरक्को में रोशनी फैलाई और संसारवासियोँ को भाई भाई बन जाने का सुख संवाद सुनाया । ऐसा हो सकता है ? वे डरते होंगे तो इस बात से कि अगर अफ्रीका के आदिवासियों ने इस्लाम कबूल कर लिया तो वे गोरोँ से बराबर का अधिकार माँगने लगेंगे । आप उनको डरने दीजिए। अगर कोई भाई भाई बनना पाप है, अगर वे इस बात से परेशान हैं कि उनका वांशिक बड़प्पन कायम न रह सकेगा तो उनका डरना उचित है, क्योकि मैने देखा है कि जूलो ईसाई हो जाता है तो वह सफेद रंग के ईसाइयों के बराबर नही हो पाता, किंतु जैसे ही वह इस्लाम धर्म ग्रहण करता है, बिल्कुल उसी वक्त वह उसी प्याले मे पानी पीता है, जिसमे कोई और मुसलमान पानी पीता और खाना खाता है । सही है यूरोपियन का काँपना ।"

Tuesday, August 10, 2010

The Soldier जाँबाज़ोँ को क्या मिलता है देश की सरकार से,बता रहे हैं सलमान खान -Ayaz Ahmad

बालीवुड में अपनी आक्रामक छवि के लिए मशहूर अभिनेता सलमान खान देश के मौजूदा हालात से नाराज़ है । नाराज़गी उन्होने टिवटर पर जाहिर की है । सलमान ने प्रश्न किया है " भारत क्या है....एक ऐसा देश, जहाँ पुलिस और एंबुलेँस से पहले पिज्जा घर पर पहुँच जाता है। यहाँ कार लोन मात्र पाँच फीसदी पर मिलता है, लेकिन पढ़ाई के लिए आपको 12% ब्याज चुकाना पड़ता है ।' सलमान ने टवीट किया है , भारत में चावल चालीस रुपए किलो मिलता है जबकि सिमकार्ड मुफ्त । यहाँ लोग देवी दुर्गा की पूजा करते है, लेकिन बेटियों की हत्या भी करते हैं।
ओलंपिक खेलों में निशानेबाज़ स्वर्ण पदक जीतते है तो सरकार उन्हे तीन करोड़ रुपए देती है , लेकिन एक और निशानेबाज़ (सुरक्षाबल) आतंकियोंसे लड़ते हुए शहीद होते है तो सरकार उन्हे एक लाख रुपए देती है । वास्तव में भारत अतुल्य है।'..... सलमान खान ने भारत की दशा का चित्रण कर दिया है । अब ब्लागर्स से सुझाव आमंत्रित है कि इस दुर्दशा से भारत को कैसे निकाला जाए ।

Monday, August 2, 2010

बाबरी मस्जिद या राम मंदिर : बौद्धिक दृष्टि में DR.AYAZ AHMAD

रामचंद्र जी एक राजा थे उन्होने शासन किया और चले गए । बाबर एक बादशाह था उसने शासन किया और चला गया । हकनामा की बाबरी मस्जिद से संबंधित पोस्ट पर चल रही बहस पढ़ कर मन मे एक सवाल उठा वह मैं ब्लाग जगत के सभी बुद्धिजीवियों के सामने रख रहा हूँ । बाबर इस देश मे आक्रमणकारी के तौर पर आया वह कब आया और कब तक उसने शासन किया और कब उसकी मृत्यु हुई यह सब ऐतिहासिक तथ्य मैं भी जानता हूँ और आप सब बुद्धिजीवी भी जानते ही होंगे लेकिन श्रीरामचंद्र जी कब पैदा हुए और कब से कब तक उन्होने शासन किया और कब उनकी मृत्यु हुई ये मैं नही जानता मगर यहाँ पर कुछ बुद्धिजीवी ऐसे मौजूद है जो यह भी जानते है कि अयोध्या मे रामचंद्र जी किस जगह पैदा हुए इसलिए वह ऊपर दिए गए सवालो के जवाब भी जानते होंगे । भारत एक धर्म प्रधान देश है धर्म और न्याय एक दूसरे के पूरक है धर्म ही सही न्याय कर सकता है इसलिए सभी न्याय पूर्वक विचार करें । और उपरोक्त सवालो के जवाब दें

Monday, July 19, 2010

मेरा भाई शाहनवाज़- डॉ. अयाज़ अहमद


आज १९ जुलाई है आज मेरी ज़िन्दगी का वह दिन है जो मुझे हमेशा याद रहेगा आज ही के दिन मेरा प्यारा भाई शाहनवाज़ अहमद मुझसे हमेशा के लिए जुदा हो गया था एक साल गुज़रने के बाद और उसका होना जैसे कल ही की बात लगती है . इस एक साल का कोई एक दिन कोई पल ऐसा नहीं गुज़रा जिसमे मैंने उसे याद न किया हो. भी वह अपनी यादों के साथ मेरे दिल के करीब है. हर आदमी की अच्छाइयां ही उसकी यादों के साथ आती है और शाहनवाज़ मे तो बहुत सारी अच्छाइयां थी जो मुझे उसे भूलने नहीं देती और रह रह उसकी याद आती रहती है .हम कुल सात भाई बहन थे जिसमे से दो हम यानि एक मै और दूसरा शाहनवाज़ था और बाकी पांच बहने है ज़िन्दगी बहुत हंसी ख़ुशी के साथ गुज़र रही थी लगता था की ज़िन्दगी बड़ी आसान है कयोंकि मेरी सारी मुश्किलात का हल तो शाहनवाज़ था उसके शब्दकोष मे मेरे काम के लिए न नाम का कोई शब्द नहीं था वोह मुझसे तकरीबन १० साल छोटा था मगर घर या क्लिनिक का कोई भी काम हो ही नहीं सकता था उसकी उम्र तकरीबन २० साल थी लेकिन इस छोटी उम्र मे वह बड़े काम आसानी से कर लेता थामरीजों की खिदमत और दीन की दावत उसका शोक था हर साल देवबंद में लगने वाले मेले मे एकता प्रदर्शनी मे ज़ोर शोर से हिस्सा लेता था लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है ब्लॉगजगत मे अपने सभी साथियों से गुज़ारिश है की आप लोग शाहनवाज़ की मग्फ़िरत के लिए और घरवालो को सब्र के लिए दुआ करे

Wednesday, July 7, 2010

ईश्वर की निगाह में कौन छोटा है ? कौन बड़ा ?DR. AYAZ AHMAD

ईश्वर ने दुनिया को व्यक्ति के लिए एक परीक्षा के तौर पर बनाया है । वह किसी को कुछ देकर परीक्षा ले रहा है और किसी को न देकर। किसी को एक चीज़ ज्यादा दी है, तो किसी को दूसरी चीज़। जब इंसान किसी चीज़ के मिलने पर ईश्वर का शुक्र अदा करता है और न मिलने पर सब्र करता है, तो वह इस परीक्षा में पास हो जाता है । जब इंसान किसी चीज़ के मिलने पर घमंड और न मिलने पर शिकायत करता है , तो वह इस परीक्षा में नाकामयाब हो जाता है। इंसान को ईश्वर ने बनाया है । इंसान को छोटा या बड़ा समझने की असल कसौटी वही होगी जो ईश्वर ने बताई है और वह है तक़वा (piousness) अर्थात ईश्वर का डर, जो इंसान को नेक बनाता है। जो इंसान ज्यादा नेक है वह ज्यादा अच्छा है और जो कम नेक है वह कम अच्छा है। और जो बिल्कुल नेक नही, वह बुरा है । ईश्वर की निगाह में जो इंसान नेक है वह बड़ा है और जो नेक नही है वह छोटा यानी कमतर है। "वास्तव मे अल्लाह के यहाँ तुम मे सबसे अधिक प्रतिष्ठित वह है , जो तुम में सबसे अधिक (अल्लाह का) डर रखता हो"। (क़ुरआन 49:13)

Monday, July 5, 2010

Suicide आत्महत्या की प्रवृत्ति पर रोकथाम का एकमात्र उपाय है इस्लाम - डॉ अयाज़


आत्महत्या आज का एक मात्र सामाजिक मसला है और आज हजारों लोग रोजाना आत्महत्या करते हैं. आखिर वह अपनी जान क्यों लेते हैं ? और क्या चीज़ उन को इस भयानक क़दम को उठाने पर मजबूर करती है, और वह क्या तरीका है जो उनके क़दम को आत्महत्या की तरफ बढ़ने से रोक सके ? इस विषय पर इस्लामी विद्वान् मौलाना मुहम्मदुल्लाह ख़लीली क़ासमी साहब ने भरपूर रौशनी डाली है. उनका ब्लॉग है: http://deoband.livejournal.com/

ADDRESSING THE MENTALITY OF SUICIDE

Muhammadullah Khalili Qasmi

Suicide, or self-killing, is a global phenomenon and has been known in every culture and society. The taking of one’s own life is the most private of acts. Suicide is the extreme step that a human been decides to put an end to his life. It is not only the result of a mere negative thinking or shallow consideration, but one is compelled to take this ‘extreme step’ only when he finds all the roads blocked and no way out.

The recent years have witnessed an alarming rise in the ratio of suicides across the world. Unlike the previous records, young people are now at the highest risk in both developed and developing countries. Globally, nearly 60% of suicide deaths are among young adults in their productive years of life. This is a distinct change, while earlier more suicides were recorded among the elderly.

Suicide is a heinous act that causes devastating effects, not only for the family members of the person but also for others associated to him in any way.

World Record

According to WHO, in the year 2000, approximately one million people died from suicide: a "global" mortality rate of 16 per 100,000. There is an average of one death every 40 seconds and an attempt every three seconds. Suicide worldwide is estimated to represent 1.8% of the total global burden of disease in 1998. In the last 45 years suicide rates have increased by 60% worldwide. Suicide is one of the leading causes of death across the world, especially in the 15-35 year age group.

The global rate of occurrence of suicide rose from 10 per 100 000 population in the 1950s to 18 per 100 000 during 1995. While it has declined in some countries, there has been a significant increase in some developing countries. Collectively, an upward trend is noticeable across the world.

Deaths recorded due to suicide across the world indicate only the tip of the iceberg. The actual number is significantly higher, because many suicides are recorded as accidents. These figures do not include suicide attempts that are up to 20 times more frequent than completed suicide. World Health Organisation records show that for every successful suicide there are about 20 cases of attempt to suicide.

Increasing Suicide Trends in India

India and Sri Lanka record the highest number of suicide rates among the South East Asia Region Member Countries and occupy the 45th positions globally. With a rate of 11 per 100000 suicides per year, an increase from 6 per 100 000 during the 1980s, India occupies the second highest rate of suicides in the Region. When corrected for underreporting, these rates are likely to be much higher. While 89000 persons committed suicide in 1995, the number increased to 96 000 in 1997 and to 104 000 in 1998, an increase of 25% compared to the previous year. This statistic becomes even more alarming when you consider that the total number of suicide cases recorded in the whole of India in 2002 was 154,000.

Kerala (29 per 100 000), Karnataka (21 per 100 000) and Tripura as well as West Bengal (19 per 100 000) had the highest rates of suicide. Among the cities, Bangalore (17%), Mumbai (14%), Chennai (11%) and Delhi (7.5%) accounted for nearly 50% of the total suicides in the country. In the Union Territory of Pondicherry, every month at least 15 youths between the ages of 15 and 25 commit suicide. In 2002, there were 10,982 suicides in Tamil Nadu, 11,300 in Kerala, 10,934 in Karnataka, and 9,433 in Andhra Pradesh. In 2003, the largest number of farmers (nearly 175) committed suicide in Andhra Pradesh. Kerala, the country's only fully literate state, has the highest number of suicides. Some 32 people commit suicide in Kerala every day. As a whole, some 50,000 people in the four states of Kerala, Karnataka, Tamil Nadu and Andhra Pradesh and the Union Territory of Pondicherry kill themselves every year.

India has officially admitted to the death of about 3,600 farmers over the last five years, most of whom were unable to repay their loans and huge interest payments. Higher rates of suicides have been noticed in the age group of 15-34 years. Out of every three cases of suicide reported every 15 minutes in India, one is committed by a youth in the age group of 15 to 29.

Why people are driven towards killing themselves?

The psychological dislocation that causes one to kill oneself has deep social roots. Suicide results from many complex socio-cultural factors. Many tend to commit suicide when they do not see their dreams materialized. The faster pace of life and the wide gap between people's aspirations and actual capabilities have led many to end their lives. Therefore, the industrialized countries have a higher suicide rate than poor, developing countries.

Financial instability, unemployment, burdensome debts are also some factors that drive one to an end to his life. Family conflicts, domestic violence, academic failures and unfulfilled ambitions share a great deal of suicide related causes. Addiction to alcohol and drug usage is also significant factor in youth suicide.

Islam has the best solution of suicide

It is a fact that Muslim countries show the lowest rates of suicide. Generally, the Muslims worldwide have lower rates compared to non-Muslims. Similarly, the Muslims who live in the West continue to have very low suicide rates compared to other communities. It is not a sheer coincidence but in fact it is the result of Islamic teachings that envelop a Muslim society and individual.

First of all, it is a part of Muslim faith that they believe in destiny; good or bad whatever is from Almighty Allah. Secondly, every Muslim believes that one day he has to die and after death he has to receive rewards of his actions; wrong or right, good or bad. On the Final Day of Judgement, Allah Almighty will make every human being alive and will ask him to present the accounts of his entire life. The concept of Final Day of Judgement is a key factor in Muslims’ life that controls their actions. Before taking a step, a Muslim first deliberates, consciously or unconsciously, that he has to reap the severe consequences of his action not only in this brief period of worldly life but also in the world hereafter. Thus, secretly, he develops a habit of fearing Almighty Allah in each and every matter that continuously keeps him guided to the straight path.

One is not sent to this world forever. According to Islamic beliefs, this World is a short stoppage of a very long journey; it is a journey far beyond death. The end of this journey is either the destination of Paradise or Hell. The life of the world hereafter is eternal and unlimited. If one has a record of good deeds he will enjoy forever and if one is cursed to have a bad record, he has to suffer either forever or for a very long period as per the seriousness of his deeds.

This worldly life has been bestowed to us to prepare for the eternal life of the world hereafter. Therefore, limiting ones desires and ambitions to one’s capabilities is utterly encouraged but required in Islam. Life is a test from Allah, He tests people in various ways and times. He tests some by blessing him with countless bounties to see if he appreciates and shows gratitude towards Allah or forgets Him. At times Allah in his infinite wisdom puts a person in intense grief, to see if the servant turns to Him and seeks guidance and help. Each and every one of us is tested by Allah in someway or another. Some turn to Allah and seek help, while some turn completely to the opposite side. Those upon whom many grieve and mourn are the people who have turned to suicide. In the time of grief and sufferings one should keep this thing in mind and keep patience and show forbearance. Patience and forbearance is highly appreciated in Islam.

Out of all the bounties, life is the most precious gift bestowed by Allah upon human beings. It is not our personal possession or property, but it is a trust from Allah to us; we can only utilize it in the ways that are have been ordained and described by Allah. We have no right to end it or damage it by our own hands.

Suicide is a major sin in Islam. The Quran has clearly prohibited from committing suicide and the Prophet of Islam assigns suicide to the lower levels of Hell. The Quran says: "And do not kill yourselves. Surely, Allah is Most Merciful to you". (4:29) "And do not throw yourselves in destruction". (2:195)

The Prophet Muhammad (peace be upon him) said: “…And whoever commits suicide with a piece of iron, he will be punished with the same piece of iron in the Hell-fire." (Bukhari, Hadith No. 1297)

"He who commits suicide by throttling shall keep on throttling himself in the Hell-fire (forever), and he who commits suicide by stabbing himself, he shall keep stabbing himself in the Hell-fire (forever)." (Bukhari, Hadith No. 1299)

"A man was inflicted with wounds and he committed suicide, and so Allah said: My slave has caused death on himself hurriedly, so I forbid Paradise for him." (Bukhari, Hadith No. 1298)

मानवता को पेश आने वाली किसी भी समस्या के समाधान में क़ुरआन मास्टर की (MASTER KEY) है DR.AYAZ AHMAD

बड़े -बड़े पुस्तक भंडार और बड़े -बड़े पुस्तकालय भी क़ुरआन का बदल नही बन सकती ।दुनिया के बड़े-बड़े बुद्धिजीवी ,दार्शनिक, विचारक , और स्कालर पूरी-पूरी ज़िँदगी खपा कर भी जीवन की जिन समस्याओं एवं गुत्थियोँ को सुलझाने में असफल रह गए , उन्हे क़ुरआन ने केवल शब्दों और एक-एक वाक्य में सुलझा दिया है । मानवता को पेश आने वाली किसी भी समस्या के समाधान में क़ुरआन मास्टर की (MASTER KEY ) है। (अबुल आला मोदूदी- हयात व ख़िदमात)

Saturday, July 3, 2010

इस्लाम का अंतिम उद्देश्य दुनिया में सत्य और शांति की स्थापना और आतंकवाद का विरोध है:- स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य


हज़रत मुहम्मद सल्ल. की पवित्र जीवनी पढ़ने के बाद मैने पाया कि आप सल्ल. ने एकेश्वरवाद के सत्य को स्थापित करने के लिए अपार कष्ट झेले। मक्का के क़ाफ़िर सत्य धर्म की राह मे रोड़ा डालने के लिए आप को तथा आपके बताए सत्य पर चलने वाले मुसलमानो को लगातार तेरह साल तक हर तरह प्रताड़ित व अपमानित करते रहे। इस घोर अत्याचार के बाद भी आप सल्ल. ने धैर्य बनाए रखा। यहाँ तक कि आपको अपना वतन मक्का छोड़ मदीना जाना पड़ा। लेकिन मक्का के मुश्ऱिक कुरैश ने आप सल्ल. का व मुसलमानो का पीछा यहाँ भी नही छोड़ा। जब पानी सिर से ऊपर हो गया तो अपनी व मुसलमानो की तथा सत्य की रक्षा के लिए मजबूर होकर आप को लड़ना पड़ा । इस तरह आप पर व मुसलमानो पर लड़ाई थोपी गई। इन्ही परस्थितियोँ मे सत्य की रक्षा के लिए जेहाद (यानी आत्मरक्षा व धर्मरक्षा के लिए धर्मयुद्ध) की आयतेँ और अन्यायी तथा अत्याचारी क़ाफ़िरो और मुश्ऱिको को दंड देने वाली आयतेँ अल्लाह की और से उतरी। पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्ल. द्वारा लड़ी गई लड़ाईयां आक्रमण के लिए न होकर, आक्रमण व आतंकवाद से बचाव के लिए थी, क्योंकि अत्याचारियों के साथ ऐसा किए बिना शांति की स्थापना नही हो सकती थी । अल्लाह के रसूल सल्ल. ने सत्य तथा शांति के लिए अंतिम सीमा तक धैर्य रखा और धैर्य की अंतिम सीमा से युद्ध की शुरुआत होती है। इस प्रकार का युद्ध ही धर्मयुद्ध यानी जेहाद कहलाता है। विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि कुरैश जिन्होने आप व मुसलमानो पर भयानक अत्याचार किए थे फतह मक्का के दिन थर थर कांप रहे थे कि आज क्या होगा? लेकिन आप सल्ल. ने उन्हे माफ कर गले लगा लिया । पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्ल. की पवित्र जीवनी से सिद्ध होता है कि इस्लाम का अंतिम उद्देश्य दुनिया में सत्य और शांति की स्थापना और आतंकवाद का विरोध है। अतः इस्लाम को हिंसा व आतंक से जोड़ना सबसे बड़ा असत्य है । यदि कोई ऐसी घटना होती है तो उसको इस्लाम से या संपूर्ण मुस्लिम समुदाय से जोड़ा नही जा सकता। (इस्लाम आतंक या आदर्श 19-20)

Wednesday, June 30, 2010

इस्लाम ही सबके हक़ पूरे करने का सही रास्ता बताता है

दुनिया मे जितने भी पैग़म्बर (संदेष्टा) उन सब की एक ही आवाज़ थी और वह है हक़ूक़ का पूरा करना , हक़ दो तरह के होते हैं एक अल्लाह के हक़ जैसे इबादत नमाज़ रोज़ा ज़कात वग़ैरा इनका सीधा अल्लाह से संबद्ध है दूसरे हक़ूक़ुलइबाद यानी बंदो के हक़। अल्लाह के जो हक है उन को अदा करने की भी सख्त ताक़ीद की गई है लेकिन इस के बावजूद इस कद्र खतरनाक नही जिस तरह बंदो के हक अदा न करने पर इंसान को बताया गया है ।इसी लिए किसी भी संदेष्टा का तरीका चाहे जो रहा हो पर सारे संदेष्टाओ ने अपनी क़ौमोँ को बंदो के हक की तरफ खास शिक्षा दी है। इबादत रोज़ा नमाज़ ज़कात वगैरा मे कमी रहने पर अल्लाह की रहमत से माफी की उम्मीद है मगर बंदो के हक खा लेने वाले व्यक्ति को माफी की कोई उम्मीद नही है। इसी लिए हज़रत मुहम्मद स.ल.व. ने तमाम मुसलमानो को हिदायत दी कि जो व्यक्ति किसी मुसलमान भाई का जो कोई हक रखता हो और वह हक बुराई करने रुहानी व जिस्मानी नुकसान पहुँचाने का हो या इज़्ज़त का हो या धन से संबंध,किसी का नाहक क़त्ल वगैरा या किसी और चीज़ के बारे मे हो तो उसको चाहिए कि इस हक को आज ही के दिन यानी इस दुनिया मे माफ करा ले इस से पहले वह दिन आए जब न तू दरहम रखता होगा और न दिनार जो उस के हक के बदले के तोर पर दे सके अगर दुनिया मे ही माफ नही कराया तो ज़ालिम के आमालनामे मे जो नेकी होंगी , तो ज़ुल्म के बराबर नेकीया ले ली जाएँगी और मज़लूम या हकदार को दे दी जाएँगी और अगर ज़ालिम नेकीयाँ नही रखता होगा तो इस सूरत मे मज़लूम या हकदार के गुनाहोँ मे से इस के हक के बक़द्र गुनाह लेकर ज़ालिम पर लाद दिए जाएँगे। ( सही बुख़ारी)

Monday, June 28, 2010

न्याय कैसे होगा?

पुरस्कार और दंड के लिए आवश्यक है कि अदालत कायम हो, हिसाब किताब हो, लोगो के पक्ष या विपक्ष मे गवाहियाँ दी जाएँ और न्यायधीश इंसाफ़ के साथ फैसला करे, दुनिया मे अगर इंसाफ़ नही होता या लोगो को उनके कर्म का बदला पुरस्कार या सज़ा नही मिलती तो इसके कई कारण है ,अपराधी पकड़ा नही जाता या उसके विरुद्ध गवाह और उसके अपराधो का ठीक ठीक आकलन नही होता रिश्वत ,सिफारिश दबाव आदि से अपराधी बच निकलता है अगर दंड मिल भी जाए तो उसके अपराधो के लिए काफी नही होता। इसी तरह जो लोग दुनिया मे अच्छे काम करते है और उनके कामों का प्रतिफल नही मिलता तो उसके भी कई कारण हो सकते है । लोगो को उनके द्वारा किए गए अच्छे कामों का पता ही न चला यदि चला भी तब भी लोगो के पास वे साधन ही नही हो जिससे वे अच्छे लोगो को उनके कारनामोँ का उचित पुरस्कार दे पाते। परलोक में इनमे से कोई व्यवधान मौजूद नही होगा। प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर की अदालत में अपने अच्छे बुरे कार्यो के साथ उपस्थित होगा । केवल ईश्वर की अदालत मे मानव को अपने किए गए कर्मो का सही प्रतिफल मिलेगा । इसी प्रतिफल का नाम स्वर्ग या नरक है

Saturday, June 26, 2010

विश्व पर्यावरण की सुरक्षा इस्लाम ही कर सकता है: प्रिंस चार्ल्स

आक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय मे राजकुमार चार्ल्स ने कहा कि संसार मे global warming रुहानी विश्वास मे कमी के कारण है , इसके लिए सिर्फ बढ़ती आबादी को ही ज़िम्मेदार नही ठहराया जा सकता ।साइंस और टैकनोलोजी को संसार के क़ुदरती निज़ाम की विनाश के लिए गलत प्रयोग किया जा रहा है। पश्चिम का केवल ग्रीन तकनीक की बुनियाद पर पर्यावरण को बेहतर बनाने का दावा गलत है इसके लिए इस्लाम के बताए रुहानी उसूलो को अपनाना होगा। प्रिंस चार्ल्स आक्सफोर्ड इस्लामिक सेंटर जिसके वह 1993 से पैटर्न भी है की 25 वीं वर्ष गाँठ के मौके पर "इस्लाम और पर्यावरण"के विषय पर बोल रहे थे अपने 50 मिनट के भाषण के बीच जिसमे मुस्लिम महिलाएँ, बुद्धिजीवी और कई देशों के राजदूत के अलावा आक्सफ़ोर्ड के मेयर जॉन गैडार्ड भी सुन रहे थे राजकुमार ने बहुत सी क़ुरआनी आयतो का हवाला देते हुए इस दौर के साइंसदानो को बताया कि पर्यावरण को सिर्फ औद्योगिकरण या आबादी ने ही नुकसान नही पहुँचाया वरन् ये इंसान के अंदर की ही गहरी रुहानी मुश्किलात की वजह से है। उन्होने कहा कि संसार को वैश्विक पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए इस्लामी रास्ते पर आना ही होगा दुनिया और मानवता को बुद्धि, समझ और रुहानी इल्म की दी गई दौलत की असल मुहाफ़िज़ इस्लामी दुनिया ही है और ये दोनो मशहूर और अनमोल उपहार इस्लाम ने ही दुनिया को दिए है । साइंसदानो को इस्लाम से पर्यावरणिय अप्रौच सीखने की ज़रूरत है । साइंस व तकनीक मे इतनी योग्यता नही है कि वह धर्म और धार्मिक शिक्षाओ से फाएदा उठाए बगैर पर्यावरण के रहस्यो पर काबू पा सके। शेल्डोनेन थिएटर मे मौजूद करीब 1000 लोगो ने प्रिंस आफ वेल्स के ऐतिहासिक भाषण के खत्म होने पर खड़े होकर तालियाँ बजाई। आक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के वाइस चाँसलर एंड्रयू हैम्लिटन ने आखिर मे मुख्य अतिथि व दूसरे मेहमानो की शुक्रिया अदा किया ।

Thursday, June 24, 2010

दुनिया को औरत की इज़्ज़त का सबक़ इस्लाम ने दिया

दुनिया को औरत की इज़्ज़त व अहतराम का सबक इस्लाम ने दिया है। हज़रत मुहम्मद स.ल.अ. ने पहली बार इंसानियत को औरतो की अज़मत से वाकिफ कराया दुनिया को सबक़ दिया कि लड़के और लड़कियो की परवरिश मे भेदभाव न करे,लड़कियो को शिक्षा देने का हुक्म दिया। माँ के कदमो के नीचे जन्नत करार दिया। जबकि पश्चिमी सभ्यता ने औरत को सिर्फ ज़िल्लत का और उपभोग का सामान बना दिया औरत को हवस और देखने की चीज़ बना दिया औरत की तरक्की का झंडा बरदार पश्चिम नाज़ुक औरत का लिहाज़ करने के बजाए औरत को मर्द बनाकर बराए नाम तरक्की देना चाहता है। जबकि इस्लाम औरत को कद्र और इज़्ज़त की निगाह से देखने के लिए कहता है। औरतो की वजह से दुनिया मे ज़्यादा बिगाड़ फैले हुए है इसलिए सुधार मे भी औरतो को ज़्यादा बड़ा किरदार अदा करने की ज़रूरत है। अल्लाह ने औरत को कुछ कर गुज़रने की ताकत ज़्यादा दी हुई है अगर औरत अपनी इस ताकत का उपयोग समाज सुधार, गलत रस्मोँ का ख़ात्मा और नैतिकता के बिगाड़ को दूर करने मे करें तो दुनिया मे शांति स्थापित होने से कोई ताकत नही रोक सकती।

Thursday, June 17, 2010

गाँधी जी और हज़रत मुहम्मद सल्ल.

गाँधी जी का कथन है। " मुहम्मद साहब (सल्ल.) रुहानी पेशवा थे ब्लकि उन की शिक्षाए को सबसे बेहतर समझता हूँ किसी रुहानी पेशवा ने ईश्वर की बादशाहत का पैग़ाम ऐसा सही और माना जाने वाला नही सुनाया जैसा पैग़म्बर ए इस्लाम मुहम्मद साहब सल्ल. ने सुनाया।"

Sunday, June 13, 2010

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।
Greatest concern of Islam is Allah
खुद को जांचिये कि क्या आपका सुप्रीम कन्सर्न अल्लाह है ?
मौलाना ने यह भी बताया कि मेरी दरयाफ़्त ‘इज्ज़‘ है। जब तक आप अपने इज्ज़ को दरयाफ़्त न कर लें तब तक आप न तो आला दर्जे की दुआ कर सकते हैं और न ही आला दर्जे की इबादत कर सकते हैं।इज्ज़ एक गुण है जो घमण्ड का विलोम है।हक़ीक़त तो यही है कि आदमी को चाहिये कि वह अपने आपको जांचता परखता रहे ताकि बेहतरी की तरफ़ उसका सफ़र जारी रह सके।

Sunday, May 16, 2010

'दंगे के धंधे की कंपनी' श्रीराम सेना पैसे पर कराती है हिंसा: धर्म और संस्कृति की रक्षा की आड़ में मुतालिक और उसके गुर्गों का असली चेहरा बेनक़ाब

देश में संस्कृति औऱ राष्ट्रीयता के नाम पर जो तोड़फोड़ औऱ हिंसा की तस्वीरें दिखती है उनका सच कुछ औऱ भी हो सकता है. संस्कृति के पहरेदार बनने का दावा करनेवालों का चेहरा कुछ और भी हो सकता है. ये कुछ और कितना भयानक और शर्मनाक हो सकता है इसका पूरा सच आजतक ने तहलका के साथ मिलकर उजागर किया है. जो लोग समाज में मर्यादा को बचाये रखने के लिये मरने मारने का दम भरते हैं उनका असली धंधा क्या है !
मैंगलोर के पब से लड़कियों को बाहर निकाल कर उनके साथ बदसलूकी करने की तस्वीरें आपके दिमाग में आज भी जिंदा होंगी और लड़कियों के साथ ऐसा सलूक करनेवाले संगठन श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक को भी आप नहीं भूले होंगे. मुतालिक की याद हम आपको इसलिये दिला रहे हैं क्योंकि हम उसी मुतालिक के असली चेहरे से रूबरू कराने जा रहे हैं.
धर्म और संस्कृति की रक्षा की आड़ में मुतालिक और उसके गुर्गों का असली चेहरा छिपा है. आजतक और तहलका की टीम ने अपने कैमरे में वो सच कैद किया है जो बताएगा कि मुतालिक राष्ट्रीयता, परंपरा और संस्कृति का पहरादार बनने का जो दावा करता है दरअसल वो एक फरेब है. सच ये है कि धर्म की आड़ में मुतालिक धंधा करता है.
एक खास धर्म की रक्षा करने की आड़ में भाड़े के गुंडो को भेजकर तोड़फोड़ कराने का धंधा करने वाले प्रमोद मुत्तालिक ने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रसाद अत्तावर से बात करने की बात कही तो तहलका-आजतक की टीम अत्तावर से मिलने निकल पड़ी.
काफी मशक्कत के बाद जब हम अत्तावर से मिले और हमने उसका सच जाना तो पैरों तले जमीन खिसक गयी और हमारा दावा है कि आप भी हैरत में पड़ जायेगे. आइये हम आपको बताते हैं श्रीराम सेना के मुखिया मुतालिक का एक और सच.
श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक का खासमखास (यानि दायां हाथ) प्रसाद अत्तावर है. अत्तावर के बारे में बाकी कुछ बताने से पहले हम आपको बताते हैं जीतेश के बारे में जो यह दावा करता है कि श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक की एक आवाज पर वो कुछ भी कर सकता है. मैंगलोर में कई दिनों की खास छानने के बाद आजतक तहलका के रिपोर्टरों से जब जीतेश टकराया तो वो हमें प्रसाद अत्तावर के पास ले गया.
जी हां प्रसाद अत्तावर, जिसका जिक्र हम आपसे पहले भी कर चुके हैं और ये भी बता चुके हैं कि ये प्रमोद मुतालिक का दायां हाथ है. इस शख्स के बारे में आजतक तहलका ने जब छानबीन शुरु की तो पता चला कि अत्तावर अंडरवर्ल्ड डान रवि पुजारी के लिये कारोबारियों से उगाही करने के लिये जेल जा चुका है. लिहाजा हमने इसका सच टटोलना शुरु किया और फिर इसने खुद ही अपना असली चेहरा हमारे सामने रख दिया.
अत्तावर ने बातचीत में हमसे कहा कि पैसा दो तो कर्नाटक ही क्यों महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल औऱ उड़ीसा में किसी भी प्रदर्शनी में तोड़फोड़ हो जायेगी. इसपर हमने अत्तावर से प्रदर्शनी को लेकर अंडरवर्ल्ड की धमकी की बात रखी.
आजतक-तहलका और अत्तावर के बीच हुई बातचीत के कुछ अंशः
तहलका-आजतक: ऐसा हो सकता है हमारी प्रदर्शनी के अंदर...रवि पुजारी कोई कमेंट कर दे मीडिया के अंदर
अत्तावर: क्यों?
तहलका-आजतक: उससे हमे और पब्लिसिटी मिल जाएगी
अत्तावर: वो कैसे?
तहलका-आजतक: मिल जाएगी
अत्तावर: कैसे?
तहलका-आजतक: किसी भी नजरिए से...वो तो सोचना पड़ेगा. मान लो उसका जो विरोधी गैंग है उसकी कोई तस्वीर प्रदर्शनी में लगा देंगे और वो धमकी दे कि हमने ऐसा क्यों किया...ऐसा ही कुछ कर दें तो.
अत्तावर: तस्वीर...तस्वीर
तहलका-आजतक: वो जबरदस्त हो जाएगा
अत्तावर: वो छोड़ो..वो करेगा ना...वो भी करेगा
अत्तावर की बात का मतलब समझें तो प्रदर्शनी को सुर्खियों में लाने के लिये ये शख्स अत्तावर, अंडरवर्ल्ड की धमकी का इंतजाम भी करा सकता है. दंगे के धंधे का सच इतना ही नहीं है. हम अत्तावर का पूरा चेहरा देखना चाहते थे इसलिये बात का सिलसिला जारी रखा औऱ फिर थोड़ी ही देर में उसने पुलिस के साथ सेटिंग का सच भी उगल दिया.
अत्तावर ने कहा कि पुलिस को विश्वास में लेकर काम करना होगा. पुलिस को पैसे देकर ‘सेट’ करना होगा. इससे हिंसा के बाद की गिरफ्तारियों को सामान्य गिरफ्तारी साबित करेगी पुलिस. हिंसा करने वाले लड़कों पर मामूली धाराएं लगवानी होंगी. अत्तावर ने कहा कि हिंसा फैलाने वाले लड़के मैंगलोर के बाहर से होंगे.
इस पूरी बात चीत से कुछ बातें शीशे की तरह साफ हैं कि औऱ वो ये कि प्रमोद मुथालिक के लोगों के अंडरवर्ल्ड से भी रिश्ते हैं. प्रमोद मुथालिक के गुर्गे फायदे के लिए अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल करते हैं. संस्कृति की दुहाई देकर दंगे का धंधा किया जाता है. पंगा, पैसा लेकर आसानी से हो जाये इसके लिये मुतालिक के लोगों की पुलिस के साथ सेटिंग भी है और हिंसा की दुकानदारी करने वाले ये लोग मासूमों को गुमराह करते हैं.
लेकिन इसी दौरान प्रसाद अत्तावर को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और हमारी डील की बात रुक जाती है. प्रसाद अत्तावर को कर्नाटक की सबसे सुरक्षित जेल बेल्लारी में रखा गया. पर प्रसाद अत्तावर कितना ताकतवर है और आसानी से पुलिस-प्रशासन को अपने हक में कर लेता है.
प्रसाद अत्तावर अंडरवर्ल्ड के इशारे पर उगाही के आरोप में पहुंच गया कर्नाटक की बेल्लारी जेल पर आजतक-तहलका की उसे बेनकाब करने की मुहिम यहीं नहीं रुकी. हमारे संवाददाता पहुंचे बेल्लारी जेल और वहां पर अत्तावर का खूंखार चेहरा हो गया बेनकाब कि कैसे पैसे के लिए श्रीराम सेना का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अपना ईमान बेचता है.
जेल में कैद प्रसाद अत्तावर ने ऐसे खुलासे किए जिनसे हड़कंप मच जाएगा. जेल में बंद होने के बावजूद अत्तावर डंके की चोट पर भाड़े में फसाद करवाने की पूरी गारंटी ले रहा था. इस गारंटी की बातचीत में अत्तावर से जो बात हुई उसके कुछ अंशः
तहलका-आजतक: पचास लड़का होगा जो तोड़फोड़...दंगा..टाइप करेगा
अत्तावर: हां...बिल्कुल...वो ये...सब किया न...पब का...ठीक वैसा ही
तहलका-आजतक: ठीक वैसा ही जैसा पब में किया था वैसी ही तोड़ फोड़...दंगा
अत्तावर: हां
तहलका-आजतक: जैसा पब में किया उससे अच्छा
अत्तावर: ये पब का कैसा हुआ...उससे बढ़िया...
तहलका-आजतक: हां
अत्तावर: ये वादा है...आपको पूरे नेशनल मीडिया में...
तहलका-आजतक: कवरेज मिल जाएगा...?
अत्तावर: हां कवरेज मिल जाएगा...नेशनल मीडिया में सब सेटिंग मैं करता हूं...
अत्तावर ये कह रहा है कि वो पब वाली तोड़फोड़ से बड़ी तोड़ करवायेगा और मीडिया में कवरेज भी दिलवायेगा. मैंगलोर जेल में अत्तावर से जब हमारी दूसरी मुलाकात हुई तो उसने इस बार हमें पैसे पर फसाद करने का अर्थशास्त्र बताया. अंडरवर्ल्ड से रिश्तों की पूरी कहानी अत्तावर ने खोलकर रख दी. साथ ही यह भी खुलासा कर दिया कि कैसे भाड़े में अंडरवर्ल्ड की धमकी भी बिकती है.
अत्तावर: नहीं..नहीं...मैंगलोर या
तहलका-आजतक: मैसूर
अत्तावर: मैसूर? दोनो जगह पर मैं सेटिंग करेगा
तहलका-आजतक: पैसा कितना लगेगा?
अत्तावर-नहीं...इधर बात करना ठीक नहीं है.
अत्तावर- मैंगलोर में...
तहलका-आजतक: हां प्रदर्शनी में 200 कार्यकर्ता होने चाहिए
अत्तावर-हां
तहलका-आजतक: पब की तरह ही तोड़-फोड़ होनी चाहिए
अत्तावर-वो मैं क्या बोलता हूं... वो सब मैं करेगा...आप रवि पुजारी को जानते हैं न...
तहलका-आजतक: जी
अत्तावर- रवि पुजारी को अपने साथ में लेगा...मैं पहले बोला था आपसे?
श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक का खासमखास प्रसाद अत्तावर ने तोड़फोड़ करने से लेकर अंडरवर्ल्ड डॉन तक का इंतजाम करने की गारंटी ली. इस बातचीत के बाद अत्तावर को मैंगलोर जेल से बेल्लारी जेल भेज दिया गया. लिहाजा तहलका-आजतक की टीम अत्तावर से मिलने बेल्लारी जेल पहुंची. यहां भी अत्तावर का असर दिख रहा था. अंदर एक अलग कमरे में हमारी मुलाकात अत्तावर से करायी गई.
अत्तावर: पेमेंट के बारे में...?
तहलका-आजतक: हां कुल कितना?
अत्तावर: अभी मैं क्या बोलता हूं...एक जगह पर होना है?
तहलका-आजतक: दो जगह, मैसूर और मैंगलोर
अत्तावर: पैसे के बारे में कैसे बात करूं
तहलका-आजतक: पुलिस की सेटिंग का है. संगठन का है. लड़का लोगों का है और आपका है. कितना कितना देना है. कुल कितना देना है. सारी सेटिंग आपको करनी है और रवि पुजारी का क्या है.
अत्तावर: वो भी मैं ही करेगा...अभी आपका दिल्ली में ये चल रहा है न...आप एक काम कीजिए कि आप मुझे अपना फोन नंबर दीजिए.
तहलका-आजतक: आप काम करोगे न
अत्तावर: हां
तहलका-आजतक: 50 लड़का मेरी पेटिंग को तोड़-फोड़ देगा
अत्तावर: हां
तहलका-आजतक: शहर के भीतर भी दंगा टाइप हो जाएगा
अत्तावर: वो सब भी कर देगा...देखेंगे आप कैसा?
श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने जब ठेके पर हिंसा फैलाने की हामी भरी, तब उसने ये भी बताया कि बैंगलोर में भी ये काम हो सकता है. खुद मुतालिक ने तहलका-आजतक के रिपोर्टर को बैंगलोर में अपने खास आदमी वसंत कुमार भवानी से मिलने को कहा. ये भवानी वही शख्स है, जो मैंगलोर में पब पर हमले के बाद श्रीराम सेना का प्रवक्ता बनकर मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा था.
प्रदर्शनी में बेवजह हिंसा फैलाने के लिए प्रमोद मुथालिक से बात पक्की होने के बाद हमारी मंज़िल था बैंगलोर शहर, जहां प्रमोद मुथालिक का सबसे खुराफाती साथी और श्रीराम सेना का बैंगलोर सिटी प्रमुख वसंत कुमार भवानी रहता है.
वसंत कुमार भवानी वही शख्स है, जो मैंगलोर के पब में हमले के बाद श्रीराम सेना का प्रवक्ता बना फिर रहा था. वैलेंटाइन डे के दिन जब कुछ लोगों ने प्रमोद मुथालिक के चेहरे पर कालिख पोती थी, तब श्रीराम सेना की ओर से जवाबी हमला बोलने वाला भी भवानी ही था. भवानी ठीक-ठाक पैसे वाला है और प्रमोद मुथालिक का सबसे खास साथी भवानी ही है. भवानी के बारे में खुद मुथालिक ने बताया था कि हिंसा फैलाने जैसे काम में भवानी बहुत माहिर है.
प्रमोद मुथालिक- मैं क्या बता रहा हूं..वहां के हमारे प्रेसिडेंट हैं.
रिपोर्टर- बैंगलोर के..?
प्रमोद मुथालिक- बैंगलोर के...वो भी बहुत स्ट्रांग हैं..आपसे परिचय हो गया?
अब आप जान गए होंगे कि मुथालिक और श्रीराम सेना के लिए कितनी अहमियत रखता है भवानी. बैंगलोर के जयनगर इलाके में एक छोटे से कैफे में भवानी से मुलाकात हुई. भवानी ने बातचीत के दौरान अपना पूरा प्लान समझाना शुरू किया कि बैंगलोर के किस इलाके में प्रदर्शनी लगाना और प्रदर्शनी में हिंसा फैलाना बेहतर होगा. भवानी- ये रवींद्र कलाक्षेत्र मालूम है ना आपको...?
रिपोर्टर- हां..हां..
भवानी- उसके पीछे एक खुला स्टेज है..
रिपोर्टर- कितना क्राउड आ सकता है उसमें...?
भवानी- दो हज़ार...
रिपोर्टर- दो हज़ार..लेकिन वो सांप्रदायिक तौर पर तो संवेदनशील है ना?
भवानी- कम्युनलवाइज़ भी सेंसिटिव है..बोले तो उधर से मार्केट बहुत नजदीक है...
रिपोर्टर- सिटी मार्केट?
भवानी- सिटी मार्केट...
रिपोर्टर- हां फिर तो उधर मुस्लिम एरिया है..
भवानी- इसलिए वो जगह बहुत अच्छा है आपके लिए..शिवाजी नगर से वहां बहुत अच्छा स्कोप है, क्योंकि वहां बगल में मुस्लिम पॉपुलेशन भी बहुत ज़्यादा है...
भवानी अच्छी तरह जानता है कि किस इलाके में हिंसा फैलाना आसान है. कला प्रदर्शनी के नाम पर हिंसा फैलाने की बात हो रही थी और वसंत कुमार नाम का ये शातिर अब हमें ये समझा रहा था कि जिस इलाके में वो हिंसा फैलाना चाहता है, उस जगह का फायदा क्या है..?
रिपोर्टर- हां सिटी मार्केट में तो है..लेकिन उधर कॉमर्शियल एरिया ज़्यादा पड़ जाता है उधर...
भवानी- आपका जो थिंकिंग है ना, उसके लिए सूट हो जाता है उधर...
रिपोर्टर- हमारी जो प्रोफाइल है उसको सूट करता है..?
भवानी- उसको सूट करता है..शिवाजीनगर से ज़्यादा सूट है..शिवाजी नगर एक रिमोट एरिया हो गया, ये फ्लोटिंग ज़्यादा है...
रिपोर्टर- शिवाजी नगर किया तो वहां पर ये लगेगा...वहां पर एजूकेटेड क्लास नहीं है तो वहां क्यों कर रहा है...सिटी मार्केट किया तो..
भवानी- आपको आइडिया के लिए और इस कॉन्सेप्ट के लिए ये मैच हो रहा है..क्योंकि इलिटरेट आके आपका गैलरी तो देखने वाला नहीं है..देखेगा तो ये आपका..अपर क्लास..मिडिल क्लास...
रिपोर्टर- एलिट क्लास..
भवानी को पता है कि जहां अपर क्लास के लोगों की भीड़ होगी, वहां तोड़-फोड़ करने से ज़्यादा सुर्खियां मिलेंगी. भवानी जिस जगह पर हिंसा फैलाने की बात कर रहा था, उसका एक और फायदा था. भवानी जानता था कि ऐसी जगह पर पूरी तैयारी के साथ हिंसा फैलाने के बाद भी किसी को शक नहीं होगा कि सब कुछ पहले से तय था.
भवानी- अपर क्लास ही ज़्यादा देखेगा.. तो अपर क्लास... आप शिवाजी नगर में रखेंगे तो कौन आएगा.. ये प्री-प्लान्ड लगेगा सबको...
रिपोर्टर- हम्मम..
भवानी- अगर शिवाजी नगर किया तो... हां ये अगर एक डायरेक्शन से सोचेंगे तो सही बात है लेकिन उसको ज़्यादा हवा नहीं मिलेगा...
रिपोर्टर- हां..लोगों को कहीं लग सकता है...कहीं अंडर टेबल अलायंस है..
भवानी- लग सकती है...
वसंत कुमार भवानी बैंगलोर में प्रदर्शनी के दौरान हिंसा फैलाने के लिए राज़ी था. वो एक-एक पहलू पर गौर करने के बाद पूरा प्लान तैयार कर चुका था और अपनी डायरी देखने के बाद उसने प्रदर्शनी में हिंसा फैलाने के लिए सबसे अच्छा दिन भी बताया. वो जानता था कि वीकेंड में प्रदर्शनी देखने के लिए ज़्यादा लोग जुटेंगे..इसलिए उसने वीकेंड का दिन चुना हिंसा फैलाने के लिए.
भवानी- वीकेंड दंगों के लिए ठीक रहता है. वीकेंड में ज़्यादा भीड़ होगी और बड़ा सीन क्रिएट होगा. पुलिस के साथ सेटिंग का जुगाड़ हम कर लेंगे. लेकिन पहले हम पैसों की बात तय कर लें.
बसंत कुमार भवानी की बातों से आप समझ सकते हैं कि बैंगलोर में दंगा भड़काना उसके लिए मामूली सी बात है. वो गारंटी दे रहा था काम की. बशर्ते कि उसे मनचाहा दाम मिले.
वसंत कुमार भवानी. श्रीराम सेना का बैंगलोर सिटी का प्रमुख ये शख्स हमारी-आपकी सोच से भी ज़्यादा शातिर है. उसने ना सिर्फ पैसे लेकर हिंसा फैलाने के लिए जगह सुझाई, बल्कि ये भी बताया कि किसे चीफ गेस्ट बनाने से हिंसा फैलाने का काम आसान होगा और जब बात पैसों की आई, तो भवानी ने एक-एक काम का रेट लिस्ट पेश कर दिया.
बैंगलोर में प्रमोद मुथालिक के राइट हैंड वसंत कुमार भवानी ने हिंसा फैलाने के लिए सिटी मार्केट की जगह क्यों चुनी, ये तो आप सुन ही चुके हैं. ये उसके प्लान का पहला हिस्सा था. ये भी इसी शातिर का आइडिया था कि अगर प्रदर्शनी में किसी मुस्लिम नेता को चीफ गेस्ट बनाया जाए, तो श्रीराम सेना का काम और भी आराम से होगा. चीफ गेस्ट बनने लायक नेताओं का नाम भी भवानी ने ही सुझाया.
भवानी- मुमताज अली को ही बुलाइए ना...
रिपोर्टर- किसको..?
भवानी- मुमताज अली को..
रिपोर्टर- ये कौन है...?
भवानी- वक्फ बोर्ड का मिनिस्टर है ना... अभी...
रिपोर्टर- कर्नाटक से..?
भवानी- हां...
रिपोर्टर- आ जाएगा वो तो..कितना एज होगा मुमताज अली का..?
भवानी- फिफ्टी के ऊपर है...
चीफ गेस्ट का नाम सुझाने के बाद भवानी ने ये बताना शुरू किया कि हिंसा फैलाने से पहले क्या-क्या तैयारी करनी है. उसने बताया कि मौके पर एंबुलेंस भी चाहिए. क्योंकि पहले से तय हिंसा में कितना खून-खराबा होगा, ये तो भवानी भी नहीं जानता.
भवानी- मैं इसका एश्योरेंस नहीं दे सकता... आपका डैमेज कितना होगा..डैमेज तो होगा.. लेकिन कितना होगा, ये गारंटी नहीं दे सकता...क्योंकि हमारे लड़के बहुत फेरोसियस (उग्र) लड़के हैं...वो आगे-पीछे नहीं देखते..
रिपोर्टर- एक बार किया तो किया...
भवानी- किया...मैं उनको अवॉयड भी नहीं कर सकता, क्योंकि मेरे ऊपर भड़क जाएंगे...जब नेता ही फेरोसियस है तो उनके फॉलोअर भी फेरोसियस होंगे...इतना मैं आपको बोलना चाहता हूं...डैमेज तो होगा लेकिन कितना होगा.. ये बोल नहीं सकता हूं..
भवानी की बातों से साफ है कि उसके गिरोह में भाड़े पर मार-पीट करने...तोड़-फोड़ करने वालों की पूरी फौज है. वो हमें बता रहा था कि एक बार उसके लड़के बेकाबू हो गए, तो उन्हें कंट्रोल करना मुश्किल होगा. इसीलिए भवानी बता रहा था कि एंबुलेंस तैयार रखना पड़ेगा.
रिपोर्टर- पब्लिक बीटिंग हो सकती है...?
भवानी- हो सकती है...उधर आके जो भी आके उनको...क्योंकि ये सब भी कर देते हैं हमारे लड़के...
पोर्टर- भीड़ वगैरह आई तो फिर कंट्रोल नहीं होता..
भवानी- कंट्रोल नहीं होता है..
रिपोर्टर- एंबुलेंस तैयार रखना पड़ेगा..?
भवानी- बिल्कुल...वो भी हो सकता है.. वो फिर मेरे लोग हैं..जब लेते हैं ना कुछ...तो फिर उनको समझाना पड़ता है...बोलना पड़ता है...केस ज़्यादा हो जाएगा..पहले से ज़्यादा केस है...कंट्रोल करो...सिर्फ जो ये डिस्प्ले है उसको थोड़ा...ये...
रिपोर्टर- डैमेज करो...
भवानी- डैमेज करो...लोगों को टच मत करो...
रिपोर्टर- ये सुनते नहीं हैं लेकिन..
भवानी- इतना तो मैं समझा दूंगा लेकिन...बोल नहीं सकते ना.. एक-आध तो रहता है जो लेके मिला उसको तोड़ दो, फोड़ दो.. ऐसे सिरफिरे लोग हैं..
प्रदर्शनी के दौरान हिंसा फैलाने का एक-एक प्लान बताने के बाद भवानी मुद्दे की बात पर आया. यानी कि दंगा फैलाने के एवज में दाम कितना मिलेगा?
रिपोर्टर- उन्होंने मुझे दो लाइन बोला था..संगठन के लिए अलग..कार्यकर्ता के लिए अलग...तो मैंने संगठन के लिए 5 लाख का..तो बोले देखेंगे..कार्यकर्ताओं के लेवल पर ये हो जाएगा कि केस वगैरह पड़ गया तो ठीक है..कार्यकर्ताओं के लिए 50 हज़ार पर...कुछ उसको मिल जाएगा..कुछ उसके केस में यूज़ हो जाएगा...दस लड़का आ गया तो 5 लाख..उन्होंने मुझे बोला यूं..संगठन का आप क्या करते हो वो मुथालिक जी के साथ है और लड़का... वो मैं आपको खुद दूंगा..पुलिस का जो सेटिंग है..वो भी करके दूंगा..कि वो भी करना पड़ेगा...
भवानी- पुलिस का सेटिंग भी करना पड़ेगा...बिना उसका नहीं होगा...
भवानी की ये बात बेहद हैरान करने वाली है. वो हिंसा फैलाने का ठेका ले रहा है और हिंसा फैलाने से पहले ही पुलिस के साथ सेटिंग करने की बात भी कह रहा है. इसके लिए वो सौदे में अलग से रकम तय करने में जुटा रहा.
रिपोर्टर- नहीं...होगा.. तो वहां पर 3 फेज़ में जा रहा है...3 डाइमेंशनल...संगठन का अलग..कार्यकर्ताओं का अलग और पुलिस का अलग...
भवानी- पुलिस का अलग...
भवानी हिंसा फैलाने के सौदे में भी पूरी सावधानी बरत रहा था. उसने बैंगलोर में हिंसा फैलाने के एवज में पहले हमसे हमारे बज़ट के बारे में पूछा और फिर ये पूछने लगा कि मैंगलोर में इस काम के लिए श्रीराम सेना के उपाध्यक्ष प्रसाद अतावर ने कितने पैसों में हामी भरी है...? भवानी की बातों से ये साफ इशारा मिल रहा था कि दंगे के धंधे में उसके और अतावर के बीच होड़ चल रही है कि संगठन के लिए कौन, कितना पैसा कमा सकता है.
गुंडागर्दी और दंगे-फसाद का जाल खुफिया कैमरे में कैद हो चुका था. सारी बातें हो चुकी थीं. तय हो चुका था कि कैसे-कैसे दिया जाएगा तोड़-फोड़ को अंजाम. पैसों की बातचीत भी मुथालिक के एक आदमी से हो चुकी थी. अब बस मुथालिक की मुहर लगनी बाकी थी. हमारी टीम फिर पहुंची मुथालिक के पास.
इस बार मुथालिक की जुबान जरा बदली हुई सी थी. पता नहीं क्या बात थी कि पिछली मुलाकात में जो सीना चौड़ा कर अपने गुंड़ों और गुंडागर्दी की बात कर रहे थे, वो इस बार आत्मा की आवाज सुन रहे थे.
हालांकि, मुथालिक की ये बातें बस अपनी छवि को बचाए रखने के लिए थीं. अगर उनकी छवि पर दाग ना लगे, तो वो कुछ भी करने को तैयार हैं. हम ये इसलिये भी कह रहे हैं क्योंकि थोड़ी देर में ही मुथालिक अपनी पुरानी बातों पर लौट आए. वो तैयार थे कि उनके लोग फसाद करेंगे. तैयार थे कि पैसा लेकर उनके गुंडे तय जगह पर तोड़फोड़ करने पहुंच जाएंगे.
बात साफ है और वो ये कि मुथालिक खुद सीधे-सीधे पैसों का लेन-देन नहीं करते. लेकिन उन्हें पता होता है कि पैसे कहां और कैसे पहुंच रहे हैं. आजतक-तहलका के खुलासे में ये बात साफ है कि परंपरा और संस्कृति के नाम पर गुंडागर्दी की जो दुकान प्रमोद मुथालिक ने अपने साथियों के साथ मिलकर खोली है, वो खूब चल रही है.
तफ्सील से बताते हैं आपको कि दंगे के धंधे की कंपनी कैसे काम करती है मुथालिक के इशारे पर. कैसे पैसे के लिए धर्म की दुकानदारी चलाता है श्रीरामसेना का मुखिया प्रमोद मुथालिक. कैसे हिन्दू संस्कृति के नाम पर दंगे करती है मुथालिक की कंपनी. श्रीराम सेना का मुखिया प्रमोद मुतालिक दंगे की सुपारी लेता है. वो पैसे रुपए की बात नहीं करता और सुपारी अपने कारिंदे प्रसाद अत्तावर को दे देता है.
प्रसाद अत्तावर पैसे के दम पर हिंसा कर सुर्खियां बटोरने वाले से पूरी डील करता है. पैसे की बात करता है और फिर अपने साथी बसंत कुमार भवानी को ठेका दे देता है. बसंत पूरी रणनीति बनाता है कि कितने पैसे पर कितने लोग किस तरह से किस मुद्दे पर विरोध की हिंसा करेंगे और किन धाराओं पर पुलिस गिरफ्तारी करेगी और किन धाराओं पर मुकदमा कायम होगा.
किस शहर में दंगा करने के लिए किस शहर से आदमी पहुंचेंगें और फिर जब पैसे रुपए और पूरी रणनीति का ब्योरा तैयार हो जाता है तो प्रमोद मुतालिक-डील फाइनल करता है. फिर बसंत और अत्तावर अपने कारिंदे पुजारी,जीतेश और कुमार को सौंप देते हैं दंगे के धंधे की डील. ये तीनों दंगाइयों का इंतजाम करते हैं. उन्हें बताते हैं कि किस चीज को तोड़ना है और किसे छोड़ना है.
वो तय करते हैं कि किसे पीटना है और किसके मुंह पर कालिख पोतनी है और वही तय करते हैं कि हिंसा को किस अंजाम तक पहुंचाना है. इस तरह से मुतालिक की कंपनी काम करती है.
दुनिया सोचती है कि उग्र हिन्दूवादी संगठन संस्कृति की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं पर हकीकत ये है कि वो तो बस पैसा कमाने के लिए लोगों का इस्तेमाल कर रहे हैं और कुछ लोग पैसे के दम पर हिंसा का ठेका दे सुर्खियां बटोर रहे होते हैं.


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वरुण गांधी से प्रभावित हैं श्रीराम सेना प्रमुख मुतालिकदेश में संस्कृति औऱ राष्ट्रीयता के नाम पर जो तोड़फोड़ औऱ हिंसा की तस्वीरें दिखती है उनका सच कुछ औऱ भी हो सकता है. संस्कृति के पहरेदार बनने का दावा करनेवालों का चेहरा कुछ और भी हो सकता है. ये कुछ और कितना भयानक और शर्मनाक हो सकता है इसका पूरा सच आजतक ने तहलका के साथ मिलकर उजागर किया है. जो लोग समाज में मर्यादा को बचाये रखने के लिये मरने मारने का दम भरते हैं उनका असली धंधा क्या है !
मैंगलोर के पब से लड़कियों को बाहर निकाल कर उनके साथ बदसलूकी करने की तस्वीरें आपके दिमाग में आज भी जिंदा होंगी और लड़कियों के साथ ऐसा सलूक करनेवाले संगठन श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक को भी आप नहीं भूले होंगे. मुतालिक की याद हम आपको इसलिये दिला रहे हैं क्योंकि हम उसी मुतालिक के असली चेहरे से रूबरू कराने जा रहे हैं.
धर्म और संस्कृति की रक्षा की आड़ में मुतालिक और उसके गुर्गों का असली चेहरा छिपा है. आजतक और तहलका की टीम ने अपने कैमरे में वो सच कैद किया है जो बताएगा कि मुतालिक राष्ट्रीयता, परंपरा और संस्कृति का पहरादार बनने का जो दावा करता है दरअसल वो एक फरेब है. सच ये है कि धर्म की आड़ में मुतालिक धंधा करता है.
एक खास धर्म की रक्षा करने की आड़ में भाड़े के गुंडो को भेजकर तोड़फोड़ कराने का धंधा करने वाले प्रमोद मुत्तालिक ने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रसाद अत्तावर से बात करने की बात कही तो तहलका-आजतक की टीम अत्तावर से मिलने निकल पड़ी.
काफी मशक्कत के बाद जब हम अत्तावर से मिले और हमने उसका सच जाना तो पैरों तले जमीन खिसक गयी और हमारा दावा है कि आप भी हैरत में पड़ जायेगे. आइये हम आपको बताते हैं श्रीराम सेना के मुखिया मुतालिक का एक और सच.
श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक का खासमखास (यानि दायां हाथ) प्रसाद अत्तावर है. अत्तावर के बारे में बाकी कुछ बताने से पहले हम आपको बताते हैं जीतेश के बारे में जो यह दावा करता है कि श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक की एक आवाज पर वो कुछ भी कर सकता है. मैंगलोर में कई दिनों की खास छानने के बाद आजतक तहलका के रिपोर्टरों से जब जीतेश टकराया तो वो हमें प्रसाद अत्तावर के पास ले गया.
जी हां प्रसाद अत्तावर, जिसका जिक्र हम आपसे पहले भी कर चुके हैं और ये भी बता चुके हैं कि ये प्रमोद मुतालिक का दायां हाथ है. इस शख्स के बारे में आजतक तहलका ने जब छानबीन शुरु की तो पता चला कि अत्तावर अंडरवर्ल्ड डान रवि पुजारी के लिये कारोबारियों से उगाही करने के लिये जेल जा चुका है. लिहाजा हमने इसका सच टटोलना शुरु किया और फिर इसने खुद ही अपना असली चेहरा हमारे सामने रख दिया.
अत्तावर ने बातचीत में हमसे कहा कि पैसा दो तो कर्नाटक ही क्यों महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल औऱ उड़ीसा में किसी भी प्रदर्शनी में तोड़फोड़ हो जायेगी. इसपर हमने अत्तावर से प्रदर्शनी को लेकर अंडरवर्ल्ड की धमकी की बात रखी.
आजतक-तहलका और अत्तावर के बीच हुई बातचीत के कुछ अंशः
तहलका-आजतक: ऐसा हो सकता है हमारी प्रदर्शनी के अंदर...रवि पुजारी कोई कमेंट कर दे मीडिया के अंदर
अत्तावर: क्यों?
तहलका-आजतक: उससे हमे और पब्लिसिटी मिल जाएगी
अत्तावर: वो कैसे?
तहलका-आजतक: मिल जाएगी
अत्तावर: कैसे?
तहलका-आजतक: किसी भी नजरिए से...वो तो सोचना पड़ेगा. मान लो उसका जो विरोधी गैंग है उसकी कोई तस्वीर प्रदर्शनी में लगा देंगे और वो धमकी दे कि हमने ऐसा क्यों किया...ऐसा ही कुछ कर दें तो.
अत्तावर: तस्वीर...तस्वीर
तहलका-आजतक: वो जबरदस्त हो जाएगा
अत्तावर: वो छोड़ो..वो करेगा ना...वो भी करेगा
अत्तावर की बात का मतलब समझें तो प्रदर्शनी को सुर्खियों में लाने के लिये ये शख्स अत्तावर, अंडरवर्ल्ड की धमकी का इंतजाम भी करा सकता है. दंगे के धंधे का सच इतना ही नहीं है. हम अत्तावर का पूरा चेहरा देखना चाहते थे इसलिये बात का सिलसिला जारी रखा औऱ फिर थोड़ी ही देर में उसने पुलिस के साथ सेटिंग का सच भी उगल दिया.
अत्तावर ने कहा कि पुलिस को विश्वास में लेकर काम करना होगा. पुलिस को पैसे देकर ‘सेट’ करना होगा. इससे हिंसा के बाद की गिरफ्तारियों को सामान्य गिरफ्तारी साबित करेगी पुलिस. हिंसा करने वाले लड़कों पर मामूली धाराएं लगवानी होंगी. अत्तावर ने कहा कि हिंसा फैलाने वाले लड़के मैंगलोर के बाहर से होंगे.
इस पूरी बात चीत से कुछ बातें शीशे की तरह साफ हैं कि औऱ वो ये कि प्रमोद मुथालिक के लोगों के अंडरवर्ल्ड से भी रिश्ते हैं. प्रमोद मुथालिक के गुर्गे फायदे के लिए अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल करते हैं. संस्कृति की दुहाई देकर दंगे का धंधा किया जाता है. पंगा, पैसा लेकर आसानी से हो जाये इसके लिये मुतालिक के लोगों की पुलिस के साथ सेटिंग भी है और हिंसा की दुकानदारी करने वाले ये लोग मासूमों को गुमराह करते हैं.
लेकिन इसी दौरान प्रसाद अत्तावर को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और हमारी डील की बात रुक जाती है. प्रसाद अत्तावर को कर्नाटक की सबसे सुरक्षित जेल बेल्लारी में रखा गया. पर प्रसाद अत्तावर कितना ताकतवर है और आसानी से पुलिस-प्रशासन को अपने हक में कर लेता है.
प्रसाद अत्तावर अंडरवर्ल्ड के इशारे पर उगाही के आरोप में पहुंच गया कर्नाटक की बेल्लारी जेल पर आजतक-तहलका की उसे बेनकाब करने की मुहिम यहीं नहीं रुकी. हमारे संवाददाता पहुंचे बेल्लारी जेल और वहां पर अत्तावर का खूंखार चेहरा हो गया बेनकाब कि कैसे पैसे के लिए श्रीराम सेना का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अपना ईमान बेचता है.
जेल में कैद प्रसाद अत्तावर ने ऐसे खुलासे किए जिनसे हड़कंप मच जाएगा. जेल में बंद होने के बावजूद अत्तावर डंके की चोट पर भाड़े में फसाद करवाने की पूरी गारंटी ले रहा था. इस गारंटी की बातचीत में अत्तावर से जो बात हुई उसके कुछ अंशः
तहलका-आजतक: पचास लड़का होगा जो तोड़फोड़...दंगा..टाइप करेगा
अत्तावर: हां...बिल्कुल...वो ये...सब किया न...पब का...ठीक वैसा ही
तहलका-आजतक: ठीक वैसा ही जैसा पब में किया था वैसी ही तोड़ फोड़...दंगा
अत्तावर: हां
तहलका-आजतक: जैसा पब में किया उससे अच्छा
अत्तावर: ये पब का कैसा हुआ...उससे बढ़िया...
तहलका-आजतक: हां
अत्तावर: ये वादा है...आपको पूरे नेशनल मीडिया में...
तहलका-आजतक: कवरेज मिल जाएगा...?
अत्तावर: हां कवरेज मिल जाएगा...नेशनल मीडिया में सब सेटिंग मैं करता हूं...
अत्तावर ये कह रहा है कि वो पब वाली तोड़फोड़ से बड़ी तोड़ करवायेगा और मीडिया में कवरेज भी दिलवायेगा. मैंगलोर जेल में अत्तावर से जब हमारी दूसरी मुलाकात हुई तो उसने इस बार हमें पैसे पर फसाद करने का अर्थशास्त्र बताया. अंडरवर्ल्ड से रिश्तों की पूरी कहानी अत्तावर ने खोलकर रख दी. साथ ही यह भी खुलासा कर दिया कि कैसे भाड़े में अंडरवर्ल्ड की धमकी भी बिकती है.
अत्तावर: नहीं..नहीं...मैंगलोर या
तहलका-आजतक: मैसूर
अत्तावर: मैसूर? दोनो जगह पर मैं सेटिंग करेगा
तहलका-आजतक: पैसा कितना लगेगा?
अत्तावर-नहीं...इधर बात करना ठीक नहीं है.
अत्तावर- मैंगलोर में...
तहलका-आजतक: हां प्रदर्शनी में 200 कार्यकर्ता होने चाहिए
अत्तावर-हां
तहलका-आजतक: पब की तरह ही तोड़-फोड़ होनी चाहिए
अत्तावर-वो मैं क्या बोलता हूं... वो सब मैं करेगा...आप रवि पुजारी को जानते हैं न...
तहलका-आजतक: जी
अत्तावर- रवि पुजारी को अपने साथ में लेगा...मैं पहले बोला था आपसे?
श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक का खासमखास प्रसाद अत्तावर ने तोड़फोड़ करने से लेकर अंडरवर्ल्ड डॉन तक का इंतजाम करने की गारंटी ली. इस बातचीत के बाद अत्तावर को मैंगलोर जेल से बेल्लारी जेल भेज दिया गया. लिहाजा तहलका-आजतक की टीम अत्तावर से मिलने बेल्लारी जेल पहुंची. यहां भी अत्तावर का असर दिख रहा था. अंदर एक अलग कमरे में हमारी मुलाकात अत्तावर से करायी गई.
अत्तावर: पेमेंट के बारे में...?
तहलका-आजतक: हां कुल कितना?
अत्तावर: अभी मैं क्या बोलता हूं...एक जगह पर होना है?
तहलका-आजतक: दो जगह, मैसूर और मैंगलोर
अत्तावर: पैसे के बारे में कैसे बात करूं
तहलका-आजतक: पुलिस की सेटिंग का है. संगठन का है. लड़का लोगों का है और आपका है. कितना कितना देना है. कुल कितना देना है. सारी सेटिंग आपको करनी है और रवि पुजारी का क्या है.
अत्तावर: वो भी मैं ही करेगा...अभी आपका दिल्ली में ये चल रहा है न...आप एक काम कीजिए कि आप मुझे अपना फोन नंबर दीजिए.
तहलका-आजतक: आप काम करोगे न
अत्तावर: हां
तहलका-आजतक: 50 लड़का मेरी पेटिंग को तोड़-फोड़ देगा
अत्तावर: हां
तहलका-आजतक: शहर के भीतर भी दंगा टाइप हो जाएगा
अत्तावर: वो सब भी कर देगा...देखेंगे आप कैसा?
श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने जब ठेके पर हिंसा फैलाने की हामी भरी, तब उसने ये भी बताया कि बैंगलोर में भी ये काम हो सकता है. खुद मुतालिक ने तहलका-आजतक के रिपोर्टर को बैंगलोर में अपने खास आदमी वसंत कुमार भवानी से मिलने को कहा. ये भवानी वही शख्स है, जो मैंगलोर में पब पर हमले के बाद श्रीराम सेना का प्रवक्ता बनकर मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा था.
प्रदर्शनी में बेवजह हिंसा फैलाने के लिए प्रमोद मुथालिक से बात पक्की होने के बाद हमारी मंज़िल था बैंगलोर शहर, जहां प्रमोद मुथालिक का सबसे खुराफाती साथी और श्रीराम सेना का बैंगलोर सिटी प्रमुख वसंत कुमार भवानी रहता है.
वसंत कुमार भवानी वही शख्स है, जो मैंगलोर के पब में हमले के बाद श्रीराम सेना का प्रवक्ता बना फिर रहा था. वैलेंटाइन डे के दिन जब कुछ लोगों ने प्रमोद मुथालिक के चेहरे पर कालिख पोती थी, तब श्रीराम सेना की ओर से जवाबी हमला बोलने वाला भी भवानी ही था. भवानी ठीक-ठाक पैसे वाला है और प्रमोद मुथालिक का सबसे खास साथी भवानी ही है. भवानी के बारे में खुद मुथालिक ने बताया था कि हिंसा फैलाने जैसे काम में भवानी बहुत माहिर है.
प्रमोद मुथालिक- मैं क्या बता रहा हूं..वहां के हमारे प्रेसिडेंट हैं.
रिपोर्टर- बैंगलोर के..?
प्रमोद मुथालिक- बैंगलोर के...वो भी बहुत स्ट्रांग हैं..आपसे परिचय हो गया?
अब आप जान गए होंगे कि मुथालिक और श्रीराम सेना के लिए कितनी अहमियत रखता है भवानी. बैंगलोर के जयनगर इलाके में एक छोटे से कैफे में भवानी से मुलाकात हुई. भवानी ने बातचीत के दौरान अपना पूरा प्लान समझाना शुरू किया कि बैंगलोर के किस इलाके में प्रदर्शनी लगाना और प्रदर्शनी में हिंसा फैलाना बेहतर होगा. भवानी- ये रवींद्र कलाक्षेत्र मालूम है ना आपको...?
रिपोर्टर- हां..हां..
भवानी- उसके पीछे एक खुला स्टेज है..
रिपोर्टर- कितना क्राउड आ सकता है उसमें...?
भवानी- दो हज़ार...
रिपोर्टर- दो हज़ार..लेकिन वो सांप्रदायिक तौर पर तो संवेदनशील है ना?
भवानी- कम्युनलवाइज़ भी सेंसिटिव है..बोले तो उधर से मार्केट बहुत नजदीक है...
रिपोर्टर- सिटी मार्केट?
भवानी- सिटी मार्केट...
रिपोर्टर- हां फिर तो उधर मुस्लिम एरिया है..
भवानी- इसलिए वो जगह बहुत अच्छा है आपके लिए..शिवाजी नगर से वहां बहुत अच्छा स्कोप है, क्योंकि वहां बगल में मुस्लिम पॉपुलेशन भी बहुत ज़्यादा है...
भवानी अच्छी तरह जानता है कि किस इलाके में हिंसा फैलाना आसान है. कला प्रदर्शनी के नाम पर हिंसा फैलाने की बात हो रही थी और वसंत कुमार नाम का ये शातिर अब हमें ये समझा रहा था कि जिस इलाके में वो हिंसा फैलाना चाहता है, उस जगह का फायदा क्या है..?
रिपोर्टर- हां सिटी मार्केट में तो है..लेकिन उधर कॉमर्शियल एरिया ज़्यादा पड़ जाता है उधर...
भवानी- आपका जो थिंकिंग है ना, उसके लिए सूट हो जाता है उधर...
रिपोर्टर- हमारी जो प्रोफाइल है उसको सूट करता है..?
भवानी- उसको सूट करता है..शिवाजीनगर से ज़्यादा सूट है..शिवाजी नगर एक रिमोट एरिया हो गया, ये फ्लोटिंग ज़्यादा है...
रिपोर्टर- शिवाजी नगर किया तो वहां पर ये लगेगा...वहां पर एजूकेटेड क्लास नहीं है तो वहां क्यों कर रहा है...सिटी मार्केट किया तो..
भवानी- आपको आइडिया के लिए और इस कॉन्सेप्ट के लिए ये मैच हो रहा है..क्योंकि इलिटरेट आके आपका गैलरी तो देखने वाला नहीं है..देखेगा तो ये आपका..अपर क्लास..मिडिल क्लास...
रिपोर्टर- एलिट क्लास..
भवानी को पता है कि जहां अपर क्लास के लोगों की भीड़ होगी, वहां तोड़-फोड़ करने से ज़्यादा सुर्खियां मिलेंगी. भवानी जिस जगह पर हिंसा फैलाने की बात कर रहा था, उसका एक और फायदा था. भवानी जानता था कि ऐसी जगह पर पूरी तैयारी के साथ हिंसा फैलाने के बाद भी किसी को शक नहीं होगा कि सब कुछ पहले से तय था.
भवानी- अपर क्लास ही ज़्यादा देखेगा.. तो अपर क्लास... आप शिवाजी नगर में रखेंगे तो कौन आएगा.. ये प्री-प्लान्ड लगेगा सबको...
रिपोर्टर- हम्मम..
भवानी- अगर शिवाजी नगर किया तो... हां ये अगर एक डायरेक्शन से सोचेंगे तो सही बात है लेकिन उसको ज़्यादा हवा नहीं मिलेगा...
रिपोर्टर- हां..लोगों को कहीं लग सकता है...कहीं अंडर टेबल अलायंस है..
भवानी- लग सकती है...
वसंत कुमार भवानी बैंगलोर में प्रदर्शनी के दौरान हिंसा फैलाने के लिए राज़ी था. वो एक-एक पहलू पर गौर करने के बाद पूरा प्लान तैयार कर चुका था और अपनी डायरी देखने के बाद उसने प्रदर्शनी में हिंसा फैलाने के लिए सबसे अच्छा दिन भी बताया. वो जानता था कि वीकेंड में प्रदर्शनी देखने के लिए ज़्यादा लोग जुटेंगे..इसलिए उसने वीकेंड का दिन चुना हिंसा फैलाने के लिए.
भवानी- वीकेंड दंगों के लिए ठीक रहता है. वीकेंड में ज़्यादा भीड़ होगी और बड़ा सीन क्रिएट होगा. पुलिस के साथ सेटिंग का जुगाड़ हम कर लेंगे. लेकिन पहले हम पैसों की बात तय कर लें.
बसंत कुमार भवानी की बातों से आप समझ सकते हैं कि बैंगलोर में दंगा भड़काना उसके लिए मामूली सी बात है. वो गारंटी दे रहा था काम की. बशर्ते कि उसे मनचाहा दाम मिले.
वसंत कुमार भवानी. श्रीराम सेना का बैंगलोर सिटी का प्रमुख ये शख्स हमारी-आपकी सोच से भी ज़्यादा शातिर है. उसने ना सिर्फ पैसे लेकर हिंसा फैलाने के लिए जगह सुझाई, बल्कि ये भी बताया कि किसे चीफ गेस्ट बनाने से हिंसा फैलाने का काम आसान होगा और जब बात पैसों की आई, तो भवानी ने एक-एक काम का रेट लिस्ट पेश कर दिया.
बैंगलोर में प्रमोद मुथालिक के राइट हैंड वसंत कुमार भवानी ने हिंसा फैलाने के लिए सिटी मार्केट की जगह क्यों चुनी, ये तो आप सुन ही चुके हैं. ये उसके प्लान का पहला हिस्सा था. ये भी इसी शातिर का आइडिया था कि अगर प्रदर्शनी में किसी मुस्लिम नेता को चीफ गेस्ट बनाया जाए, तो श्रीराम सेना का काम और भी आराम से होगा. चीफ गेस्ट बनने लायक नेताओं का नाम भी भवानी ने ही सुझाया.
भवानी- मुमताज अली को ही बुलाइए ना...
रिपोर्टर- किसको..?
भवानी- मुमताज अली को..
रिपोर्टर- ये कौन है...?
भवानी- वक्फ बोर्ड का मिनिस्टर है ना... अभी...
रिपोर्टर- कर्नाटक से..?
भवानी- हां...
रिपोर्टर- आ जाएगा वो तो..कितना एज होगा मुमताज अली का..?
भवानी- फिफ्टी के ऊपर है...
चीफ गेस्ट का नाम सुझाने के बाद भवानी ने ये बताना शुरू किया कि हिंसा फैलाने से पहले क्या-क्या तैयारी करनी है. उसने बताया कि मौके पर एंबुलेंस भी चाहिए. क्योंकि पहले से तय हिंसा में कितना खून-खराबा होगा, ये तो भवानी भी नहीं जानता.
भवानी- मैं इसका एश्योरेंस नहीं दे सकता... आपका डैमेज कितना होगा..डैमेज तो होगा.. लेकिन कितना होगा, ये गारंटी नहीं दे सकता...क्योंकि हमारे लड़के बहुत फेरोसियस (उग्र) लड़के हैं...वो आगे-पीछे नहीं देखते..
रिपोर्टर- एक बार किया तो किया...
भवानी- किया...मैं उनको अवॉयड भी नहीं कर सकता, क्योंकि मेरे ऊपर भड़क जाएंगे...जब नेता ही फेरोसियस है तो उनके फॉलोअर भी फेरोसियस होंगे...इतना मैं आपको बोलना चाहता हूं...डैमेज तो होगा लेकिन कितना होगा.. ये बोल नहीं सकता हूं..
भवानी की बातों से साफ है कि उसके गिरोह में भाड़े पर मार-पीट करने...तोड़-फोड़ करने वालों की पूरी फौज है. वो हमें बता रहा था कि एक बार उसके लड़के बेकाबू हो गए, तो उन्हें कंट्रोल करना मुश्किल होगा. इसीलिए भवानी बता रहा था कि एंबुलेंस तैयार रखना पड़ेगा.
रिपोर्टर- पब्लिक बीटिंग हो सकती है...?
भवानी- हो सकती है...उधर आके जो भी आके उनको...क्योंकि ये सब भी कर देते हैं हमारे लड़के...
पोर्टर- भीड़ वगैरह आई तो फिर कंट्रोल नहीं होता..
भवानी- कंट्रोल नहीं होता है..
रिपोर्टर- एंबुलेंस तैयार रखना पड़ेगा..?
भवानी- बिल्कुल...वो भी हो सकता है.. वो फिर मेरे लोग हैं..जब लेते हैं ना कुछ...तो फिर उनको समझाना पड़ता है...बोलना पड़ता है...केस ज़्यादा हो जाएगा..पहले से ज़्यादा केस है...कंट्रोल करो...सिर्फ जो ये डिस्प्ले है उसको थोड़ा...ये...
रिपोर्टर- डैमेज करो...
भवानी- डैमेज करो...लोगों को टच मत करो...
रिपोर्टर- ये सुनते नहीं हैं लेकिन..
भवानी- इतना तो मैं समझा दूंगा लेकिन...बोल नहीं सकते ना.. एक-आध तो रहता है जो लेके मिला उसको तोड़ दो, फोड़ दो.. ऐसे सिरफिरे लोग हैं..
प्रदर्शनी के दौरान हिंसा फैलाने का एक-एक प्लान बताने के बाद भवानी मुद्दे की बात पर आया. यानी कि दंगा फैलाने के एवज में दाम कितना मिलेगा?
रिपोर्टर- उन्होंने मुझे दो लाइन बोला था..संगठन के लिए अलग..कार्यकर्ता के लिए अलग...तो मैंने संगठन के लिए 5 लाख का..तो बोले देखेंगे..कार्यकर्ताओं के लेवल पर ये हो जाएगा कि केस वगैरह पड़ गया तो ठीक है..कार्यकर्ताओं के लिए 50 हज़ार पर...कुछ उसको मिल जाएगा..कुछ उसके केस में यूज़ हो जाएगा...दस लड़का आ गया तो 5 लाख..उन्होंने मुझे बोला यूं..संगठन का आप क्या करते हो वो मुथालिक जी के साथ है और लड़का... वो मैं आपको खुद दूंगा..पुलिस का जो सेटिंग है..वो भी करके दूंगा..कि वो भी करना पड़ेगा...
भवानी- पुलिस का सेटिंग भी करना पड़ेगा...बिना उसका नहीं होगा...
भवानी की ये बात बेहद हैरान करने वाली है. वो हिंसा फैलाने का ठेका ले रहा है और हिंसा फैलाने से पहले ही पुलिस के साथ सेटिंग करने की बात भी कह रहा है. इसके लिए वो सौदे में अलग से रकम तय करने में जुटा रहा.
रिपोर्टर- नहीं...होगा.. तो वहां पर 3 फेज़ में जा रहा है...3 डाइमेंशनल...संगठन का अलग..कार्यकर्ताओं का अलग और पुलिस का अलग...
भवानी- पुलिस का अलग...
भवानी हिंसा फैलाने के सौदे में भी पूरी सावधानी बरत रहा था. उसने बैंगलोर में हिंसा फैलाने के एवज में पहले हमसे हमारे बज़ट के बारे में पूछा और फिर ये पूछने लगा कि मैंगलोर में इस काम के लिए श्रीराम सेना के उपाध्यक्ष प्रसाद अतावर ने कितने पैसों में हामी भरी है...? भवानी की बातों से ये साफ इशारा मिल रहा था कि दंगे के धंधे में उसके और अतावर के बीच होड़ चल रही है कि संगठन के लिए कौन, कितना पैसा कमा सकता है.
गुंडागर्दी और दंगे-फसाद का जाल खुफिया कैमरे में कैद हो चुका था. सारी बातें हो चुकी थीं. तय हो चुका था कि कैसे-कैसे दिया जाएगा तोड़-फोड़ को अंजाम. पैसों की बातचीत भी मुथालिक के एक आदमी से हो चुकी थी. अब बस मुथालिक की मुहर लगनी बाकी थी. हमारी टीम फिर पहुंची मुथालिक के पास.
इस बार मुथालिक की जुबान जरा बदली हुई सी थी. पता नहीं क्या बात थी कि पिछली मुलाकात में जो सीना चौड़ा कर अपने गुंड़ों और गुंडागर्दी की बात कर रहे थे, वो इस बार आत्मा की आवाज सुन रहे थे.
हालांकि, मुथालिक की ये बातें बस अपनी छवि को बचाए रखने के लिए थीं. अगर उनकी छवि पर दाग ना लगे, तो वो कुछ भी करने को तैयार हैं. हम ये इसलिये भी कह रहे हैं क्योंकि थोड़ी देर में ही मुथालिक अपनी पुरानी बातों पर लौट आए. वो तैयार थे कि उनके लोग फसाद करेंगे. तैयार थे कि पैसा लेकर उनके गुंडे तय जगह पर तोड़फोड़ करने पहुंच जाएंगे.
बात साफ है और वो ये कि मुथालिक खुद सीधे-सीधे पैसों का लेन-देन नहीं करते. लेकिन उन्हें पता होता है कि पैसे कहां और कैसे पहुंच रहे हैं. आजतक-तहलका के खुलासे में ये बात साफ है कि परंपरा और संस्कृति के नाम पर गुंडागर्दी की जो दुकान प्रमोद मुथालिक ने अपने साथियों के साथ मिलकर खोली है, वो खूब चल रही है.
तफ्सील से बताते हैं आपको कि दंगे के धंधे की कंपनी कैसे काम करती है मुथालिक के इशारे पर. कैसे पैसे के लिए धर्म की दुकानदारी चलाता है श्रीरामसेना का मुखिया प्रमोद मुथालिक. कैसे हिन्दू संस्कृति के नाम पर दंगे करती है मुथालिक की कंपनी. श्रीराम सेना का मुखिया प्रमोद मुतालिक दंगे की सुपारी लेता है. वो पैसे रुपए की बात नहीं करता और सुपारी अपने कारिंदे प्रसाद अत्तावर को दे देता है.
प्रसाद अत्तावर पैसे के दम पर हिंसा कर सुर्खियां बटोरने वाले से पूरी डील करता है. पैसे की बात करता है और फिर अपने साथी बसंत कुमार भवानी को ठेका दे देता है. बसंत पूरी रणनीति बनाता है कि कितने पैसे पर कितने लोग किस तरह से किस मुद्दे पर विरोध की हिंसा करेंगे और किन धाराओं पर पुलिस गिरफ्तारी करेगी और किन धाराओं पर मुकदमा कायम होगा.
किस शहर में दंगा करने के लिए किस शहर से आदमी पहुंचेंगें और फिर जब पैसे रुपए और पूरी रणनीति का ब्योरा तैयार हो जाता है तो प्रमोद मुतालिक-डील फाइनल करता है. फिर बसंत और अत्तावर अपने कारिंदे पुजारी,जीतेश और कुमार को सौंप देते हैं दंगे के धंधे की डील. ये तीनों दंगाइयों का इंतजाम करते हैं. उन्हें बताते हैं कि किस चीज को तोड़ना है और किसे छोड़ना है.
वो तय करते हैं कि किसे पीटना है और किसके मुंह पर कालिख पोतनी है और वही तय करते हैं कि हिंसा को किस अंजाम तक पहुंचाना है. इस तरह से मुतालिक की कंपनी काम करती है.
दुनिया सोचती है कि उग्र हिन्दूवादी संगठन संस्कृति की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं पर हकीकत ये है कि वो तो बस पैसा कमाने के लिए लोगों का इस्तेमाल कर रहे हैं और कुछ लोग पैसे के दम पर हिंसा का ठेका दे सुर्खियां बटोर रहे होते हैं.


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Friday, May 7, 2010

माँ -बाप

ईश्वर ने एक जगह पवित्र क़ुरआन मे कहा "अगर माँ बाप मे से कोई एक या दोनो तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच तो उन्हे कोई अप्रिय बात न कहो और न उन्हे झिड़को।" मतलब उन्हे मारना पीटना, भला बुरा कहना, तकलीफ देना तो दूर की बात है, उन्हे कोई ऐसी बात भी कही नही जा सकती,जिसे वे बुरा समझे।अगर वे ऐसी बातें करें जो तुम्हे नापसंद हो तो उन्हे बरदाश्त और गवारा करो और उन्हे झिड़को मत,उनको हर समय खुश रखो

Sunday, April 18, 2010

सुरेंदर शर्मा अज्ञात मशहूर किताबें

सरिता व मुक्‍ता इस की संबंधित पत्रिकाओं में समय समय पर हिंदू समाज, प्राचीन भारतीय संसकृति, आर्थिक, सामाजिक तथा पारिवारिक समस्याओं पर प्रकाशित विचारणीय लेखों के रिप्रिंट अब 12 सैटों में उपलब्ध, हर सेट में लगभग 25 लेखपुस्तकः हिंदू समाज के पथभ्रष्टक तुलसीदासहिंदू समाज को पथभ्रष्ट करने वाले इस संत कवि के साहित्यिक आडंबरों की पोल खोलकर उस की वास्तविकता उजागर करना ही इस पुस्तक का उददेश्य हैपुस्तक, रामायणः एक नया दृष्टिकोणप्रचलित लोक धारणा के विपरीत कोई धर्म ग्रंथ न होकर एक साहित्यिक रचना है, इसी तथ्य को आधार मानते हूए रामायण के प्रमुख पात्रों, घटनाओं के बारे में अपना चिंतन प्रस्तुत किया है, रामायण की वास्तविकता को समझने के लिए विशेष पुस्तकपुस्तकः हिंदू इतिहासः हारों की दास्तानप्रचलित लोक धारणा के विपरीत कोई धर्म ग्रंथ न होकर एक साहित्यिक रचना है, इसी तथ्य को आधार मानते हुए रामायण के प्रमुख पात्रों, घटनाओं के बारे में अपना चिंतन प्रस्तुत किया है रामायण की वास्तविकता को समझने के लिए विशेष पुस्तकपुस्तकः क्या बालू की भीत पर खडा है हिंदू धर्म?862 पृष्ठ मूल्य 175 रूपयेपुस्तकः कितने अप्रासंगिक हैं धर्म ग्रंथलेखक राकेशनाथ336 पृष्ठ मूल्य 70 रूपयपुस्तकः हिंदू संस्‍कृतिः हिन्‍दुओं का सामाजिक विषटनपुस्तकः कितना महंगा धर्मEnglish book:The Ramayana : A new Point of viewHindu: A wounded societyThe history of Hindus: the Saga of defeatsA study of the ethics of the banishment of SitaTulsidas: Misguider of Hindu societyThe Vedas; the quintessence of Vedic AnthologiesIndia: what can it teach us!God is my एनेमीमिलने के पतेदिल्ली बुक क.एम 12, कनाट सरकस, नई दिल्ली . 110001दिल्ली प्रेसई. 3, झंडेवाला, नई दिल्ली . 11..55फैक्स न . 51540714, 23625020503ए नारायण चैंबर्स, आश्रम रोड, अहमदाबाद - 380009जी 3, निचली मन्जिल, एच.वी.एस. कोर्ट, 21 कनिंघम रोड, बेंगलूर 56005279ए, मित्तल चैंबर्स, नरीमन पाइंट, मुम्बई 400021पोददार पाइंट, तीसरी मंजिल, 113 पार्क स्टीट, कोलकाता 700016जी 7, पायनियर टावर्स, मेरीन डाइव, कोच्चि 682031बी. जी 3,4 , सप्रू मार्ग, लखनउ 22600114, पहली मंजिल, सीसंस कांप्लैक्स, मांटीअथ रोड, चेन्नई 600008111, आशियाना टावर्स, ऐगिजबिशन रोड, पटना 800001122, चिनौय टेड सेंटर, 116, पार्क लेन, सिकंदराबाद 500003

Friday, April 16, 2010

अल्लाह के चमत्कार...हर तरफ...!!! Miracle's Of Allah Everywhere

तआला के सिवा कोई पुज्य नही है और अल्लाह तआला को जो करिश्मा दिखाना था वो १४०० saal पहले कुरआन के रुप में सबको दिखा चुकें है लेकिन कुछ लोग है जो अब भी यकीन नहीं करते है ऐसे लोगो की आखें खोलने के लिये अल्लाह तआला ने इस दुनिया के लोगो को बहुत से चमत्कार दिखायें। ऐसी ही कुछ तस्वीरें और एक वीडियो मेरे पास काफ़ी दिनो से मौजुद थी तो मैने सोचा आप लोगो को भी दिखा दूं। अल्लाह तआला चाहे हर चीज़ पर औallaahर हर चीज़ से अपना नाम लिख सकता है चाहे वो बाद्ल में, समुंद्र में, आसमान में, पेड से,....रुकु की हालत में पेडये पेड सिडनी, आस्ट्रेलिया के जंगल में पाया गया था। ये रुकु की हालत में है और इसका रुख काबे की तरह है जिस तरफ़ रुख करकें हर मुसलमान नमाज़ पडता

प्रसिद्ध भारतीय मनोचिकित्सक ने इस्लाम अपनाया

प्रियदर्शन बने अब्दुल्लाह

प्रसिद्ध भारतीय मनोचिकित्सक ने इस्लाम अपनाया यह खबर गुरुवार की है.गवाह बना है अर रियाद का दावत केंद्र.डा. प्रियदर्शन यानी अब्दुल्ला ने शुक्रवार को अरब न्यूज से कहा कि इस्लाम दुनिया का एकमात्र धर्महैजिसके पास सीधे अल्लाह के यहाँ से अवतरित किताब कुर'आन है.उन्होंने कहा कि तुलनात्मक धर्मों के एक छात्र के रूप में उनका का मानना है कि अन्य धर्मों की पुस्तकों परमेश्वर की ओर से मानव जाति के लिए सीधे नहीं अवतरित हुयी हैं .उन्होंने कहा कि पवित्र कुरान उसी प्रारूप और शैली में भी है, जिस प्रकार यह पैगंबर मुहम्मद (सल लल लाहो अलैहे वसल्लम ) को नाज़िल हुई थी .डॉ. अब्दुल्ला लॉस एंजिल्स में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अतिथि प्रोफेसर हैं.उन्होंने एक प्रसिद्ध तमिल फिल्म Karuthamma में अभिनय भी किया है. यह फिल्म भारत के कुछ दूरदराज के गांवों में नवजात शिशु [ लड़कियों] की हत्याओं पर केन्द्रित है.. फिल्म को उसके प्रोडक्शन के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था .
लेखक: talib د عا ؤ ں کا طا لب
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लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...