Skip to main content

Posts

Showing posts from 2010

darululoom deobandदारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान chanceller

विश्व विख्यात दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान का बुधवार को बिजनौर में इंतकाल हो गया। वह 96 वर्ष के थे। देर शाम उन्हें देवबंद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद हजारों लोग उनके घर पर अफसोस जाहिर करने पहुंचे।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव समेत कई नामचीन हस्तियों ने मौलाना साहब के निधन पर खिराजे अकीदत पेश की। मौलाना मरगूबुर्रहमान को 1982 में दारुल उलूम का मोहतमिम चुना गया था। उस वक्त दारुल उलूम विभाजन के तूफानी दौर से गुजर रहा था, लेकिन मौलाना अपनी ईमानदारी और सलाहियत से कश्ती को किनारे पर ले आए।
जमींदार घराने से ताल्लुक रखने वाले मौलाना बिना तनख्वाह दारुल उलूम की खिदमत करते रहे। उनके कार्यकाल में दारुल उलूम देवबंद ने नए आयाम स्थापित किए। मौलाना साहब ने मुस्लिम समाज में लड़कियों की तालीम पर खास अभियान चलाया। साथ ही मुगलकाल के बाद उन्होंने पत्थर की शानदार मस्जिद रशीद की तामीर कराई, जो दुनिया की खूबसूरत मस्जिदों में शुमार की जाती है।
मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान के जनाजे की नमाज दारुल उलूम के अहता-ए-मौलसरी में अदा की गई। जिसमें हजारों लोगों ने शिर…

Charity ईद की नमाज़ से पहले अदा करना चाहिए फ़ितरा Ayaz Ahmad

रमज़ानुल मुबारक का महीना अल्लाह की ईबादत (उपासना) और इताअत (समर्पण) का महीना है इस महीने मे हर अमल (अच्छे काम) पर सवाब (पुण्य) बढ़ा दिया जाता है ।रोज़े का बदला अल्लाह खुद इनायत करता है । रोज़ेदार कितनी भी एहतयात करें तब भी कुछ छोटी मोटी गलतियाँ हो ही जाती है जैसे लड़ाई, झगड़ा, झूठ, एक दूसरे की बुराई । इस तरह की बुराइयों से हमेशा पूरी तरह बचा नही जा सकता । इसी तरह की गलतियों की तलाफ़ी के लिए सदकातुलफ़ितर (दान) को वाजिब (ज़रूरी) करार दिया गया है। फ़ितरा रोज़ो की ज़कात है जो सब मुसलमानों बालिग़, नाबालिग़ मर्द औरत पर लाज़िम है । नबी करीम स.अ.व. ने फ़ितरा को ज़रूरी करार दिया जो रोज़ेदारो के लिए बुरी और बेहयाई की बातों से पाकीज़गी (पवित्र ) होने का ज़रिया है और गरीबों और मिस्कीनोँ के लिए खाने का इंतज़ाम है जो आदमी फ़ितरा को ईद की नमाज़ से पहले अदा करता है तो यह मक़बूल ज़कात होगी और अगर कोई आदमी इसे नमाज़ के बाद अदा करता है तो यह आम सदक़ा (दान) होगा । सदक़ा तुल फ़ितर वाजिब (अनिवार्य) करने के दो मकसद है एक रोज़ेदारो की गलतियों की तलाफ़ी और दूसरा गरीबों के लिए ईद के दिन खाने का …

Balanced diet for Indian soldiers. अँडा खाओ देश बचाओ Ayaz Ahmad

सैनिकों के राशन पर सीएजी की फटकार का असर नज़र आने लगा है । रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों की सेहत की सुध लेते हुए उनके आहार को और पौष्टिक बनाने का फैसला किया है ।इस कवायद में फील्ड और पीस एरिया में तैनात जवानों को जहाँ अब हर दिन दो अंडे दिए जाएँगे ।वहीं नौ हज़ार फुट और उससे अधिक ऊँचाई पर तैनात जवानों को दिन में एक के बजाए दो अंडे मिलेंगे । (दैनिक जागरण 31 अगस्त 2010)
सैनिकों की यह खुराक बड़े वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद तय की जाती है देश की रक्षा में तैनात जवानों की सेहत का पूरा ध्यान सरकार को रखना पड़ता है सिर्फ शाकाहार जवानों को संतुलित आहार प्रदान नही कर सकता क्योकि इससे शरीर मे सही मात्रा में प्रोटीन की ज़रूरत पूरी नही हो सकती । इसलिए सरकार ही का दायित्व है कि वह जवानों के संतुलित आहार का इंतजाम करे । क्योकि प्रोटीन की कमी के कारण जवानों मे कुपोषण हो सकता है और वह युद्ध के समय मे देश व सैनिकों के लिए घातक हो सकता है । अब देश के नागरिकों का भी फ़र्ज़ है वह भी देश के लिए हर परिस्थिति के लिए हर समय तैयार रहें देश के हर समय जान देने व लेने के लिए तैयार रहें । कभी ऐसी स्थिति आने पर मांसाहार न करने…

The reality of vegetarianism.बेज़ुबान पेड़ों के मासूम भ्रूण को खाने वालो को दयालू कहा जाएगा या निर्दयी ?- Ayaz Ahmad

महक भाई जो प्रश्न आपने उठाए हैं उनका जवाब तो आपकी पोस्ट पर ही अलग अलग कई विद्वान दे चुके हैं लेकिन जब आपको समझना ही नही है तो कोई आपको समझा कैसे सकता है । * हमें आपके आहार पर कोई आपत्ति नही है लेकिन आप हमारे आहार पर ऐतराज़ जताते हुए हमें पापी घोषित कर चुके है और चाहते है कि मांसाहार करने के बदले मे हमें मृत्यु दंड दे दिया जाए ये आपका निजी विचार है जो की ग़लत है और इससे सभी शाकाहारी भी सहमत नही हैं । **हमारा सवाल तो यह है कि बकरा हो या आलू टमाटर जब दोनो ही जीवधारी हैं तो फिर ज़्यादा निरीह तो यह सब्जियाँ हैं जो मरते समय शोर पुकार फ़रियाद भी नही कर सकती इन सब्जियों की हत्या करने का अधिकार आप किस तर्क से पा सकते है ।
*** पेड़ों मे भी नर मादा होते है फूल फ़र्टिलाइज़ेशन के बाद फल बन जाता है बाज़ार मे जो फल आते हैं वह पेड़ द्वारा त्यागे नही होते ब्लकि उन्हे पेड़ से तोड़ा गया होता है पेड़ के लिए फल ठीक ऐसा ही है जैसा कि गर्भवती औरत के लिए उसका भ्रूण यदि आप मनुष्य का भ्रूण नही खा सकते तो फिर आप फल खाने के लिए क्या तर्क पेश करेंगे ।
**** मनुष्य को खाने के लिए अंतरिक्ष से किसी प…

Jain opinion about man's food. क्या भोजन के संबंध मे जैन विचार व्यवहारिक और आदर्श है ? Ayaz Ahmad

सुज्ञ जी ! जैन दर्शन का आदर्श आचरण जैन साधु है जो न तो टूथब्रश करते है और न साबुन से नहाते है, अपने बाल अपने हाथों से फाड़ते ताकि जीव हत्या न हो । भिक्षा माँगकर खाते हैं 24 घंटे मे सिर्फ एक बार वह भी खड़े खड़े हथेली पर लेकर जो मात्र दो ग्रास होता है ।
संक्षेप मे यह है जैन साधुओ का आहार संबंधी आचरण । यह न तो शरीर की आवश्यकता को पूरा करता है और न इसे संतुलित और पोष्टिक आहार कहा जा सकता है जिसे मनुष्य के लिए साइंटिस्ट ज़रूरी बताते है । ऐसे आहार से मनुष्य की काया जर्जर होती चली जाती है ऐसा आहार शरीर को पुष्ठ नही नष्ट करता है ।
1. क्या आप चाहते है कि सभी भारतीय ऐसा आहार ग्रहण करें और कमजोर हो जाए और शत्रु देश के लोग आ दबाएं ?
2.क्या विश्व मे सभी के लिए यह व्यवस्था व्यवहारिक और आदर्श है ?
3.सुज्ञ जी ! क्या आप स्वयं भी भोजन संबंधी इस जैन विचार के अनुसार ही खाते पीते है ?

What should be man's food ? शाकाहार के लिए जीव हत्या क्यो ? Ayaz Ahmad

sugh जी शाकाहार के लिए खेतों मे उपजाए अन्न के लिए क्या जीवों की हत्या करना ठीक है या गलत ? खेतों बीज डालने से लेकर फसल काटने तक कितने जीवों की हत्या होती है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है । खेतों मे जब हल चलाया जाता है कितने जीव मरते है, उसके बाद कीटनाशक के प्रयोग से कितने जीवों को मार दिया जाता है फसलो को बचाने के नाम पर कितनी नीलगाय मार दी जाती है या क्रूरता से घायल कर दी जाती है । क्या इन सब संसाधनों पर इन जीवों का भी हक नही है फिर इन्हे अधिकार के बजाए अकाल मौत क्यो मिलती है? गाय के दूध पर किसका अधिकार है ? एक माँ के दूध पर उसके बच्चे का अधिकार होता है या किसी और का ?फिर शाकाहार के नाम पर मनुष्य उस बच्चे के हिस्सा पी जाता है क्या यह जीवों के प्रति हिंसा नही है ? माँ के दूध के अभाव मे जैसे मनुष्य का बच्चा बीमार होकर कमज़ोर हो जाता है और सारी उम्र पनप नही पाता क्या पशुओं के बच्चों के साथ यह स्थिति नही होती ? फिर शाकाहार के नाम पर यह दोहरा पैमाना क्यों ? आप क्यो उन बछड़ोँ के लिए संघर्ष नही करते और उन दूसरे जीवों के लिए संघर्ष नही करते जो खेती के नाम पर मार दिए जाते है और जो फसलों को बोन…

Mahatma Gandhi का संदेश, इस्लाम का अध्ययन करें प्रेम बढ़ेगा । AYAZ AHMAD

"इस्लाम अपने अत्यंत विस्तार काल मे भी अनुदार नही था, ब्लकि सारा संसार उसकी प्रशंसा कर रहा था । उस समय जबकि पश्चिमी दुनिया अंधकारमय थी, पूर्व क्षितिज मे एक उज्जवल सितारा चमका, जिससे विकल संसार को प्रकाश और शांति प्राप्त हुई ।इस्लाम झूठा मज़हब नही है , हिंदुओ को भी इसका उसी तरह अध्ययन करना चाहिए, जिस तरह मैने किया है । फिर वे भी मेरे ही समान इससे प्रेम करने लगेंगे ।" "मुझसे किसी ने कहा था कि दक्षिण अफ्रीका मे जो युरोपियन आबाद है, वे इस्लाम के प्रचार से कांप रहे है, उसी इस्लाम से जिसने मोरक्को में रोशनी फैलाई और संसारवासियोँ को भाई भाई बन जाने का सुख संवाद सुनाया । ऐसा हो सकता है ? वे डरते होंगे तो इस बात से कि अगर अफ्रीका के आदिवासियों ने इस्लाम कबूल कर लिया तो वे गोरोँ से बराबर का अधिकार माँगने लगेंगे । आप उनको डरने दीजिए। अगर कोई भाई भाई बनना पाप है, अगर वे इस बात से परेशान हैं कि उनका वांशिक बड़प्पन कायम न रह सकेगा तो उनका डरना उचित है, क्योकि मैने देखा है कि जूलो ईसाई हो जाता है तो वह सफेद रंग के ईसाइयों के बराबर नही हो पाता, किंतु जैसे ही वह इस्लाम धर्म…

The Soldier जाँबाज़ोँ को क्या मिलता है देश की सरकार से,बता रहे हैं सलमान खान -Ayaz Ahmad

बालीवुड में अपनी आक्रामक छवि के लिए मशहूर अभिनेता सलमान खान देश के मौजूदा हालात से नाराज़ है । नाराज़गी उन्होने टिवटर पर जाहिर की है । सलमान ने प्रश्न किया है " भारत क्या है....एक ऐसा देश, जहाँ पुलिस और एंबुलेँस से पहले पिज्जा घर पर पहुँच जाता है। यहाँ कार लोन मात्र पाँच फीसदी पर मिलता है, लेकिन पढ़ाई के लिए आपको 12% ब्याज चुकाना पड़ता है ।' सलमान ने टवीट किया है , भारत में चावल चालीस रुपए किलो मिलता है जबकि सिमकार्ड मुफ्त । यहाँ लोग देवी दुर्गा की पूजा करते है, लेकिन बेटियों की हत्या भी करते हैं।
ओलंपिक खेलों में निशानेबाज़ स्वर्ण पदक जीतते है तो सरकार उन्हे तीन करोड़ रुपए देती है , लेकिन एक और निशानेबाज़ (सुरक्षाबल) आतंकियोंसे लड़ते हुए शहीद होते है तो सरकार उन्हे एक लाख रुपए देती है । वास्तव में भारत अतुल्य है।'..... सलमान खान ने भारत की दशा का चित्रण कर दिया है । अब ब्लागर्स से सुझाव आमंत्रित है कि इस दुर्दशा से भारत को कैसे निकाला जाए ।

बाबरी मस्जिद या राम मंदिर : बौद्धिक दृष्टि में DR.AYAZ AHMAD

रामचंद्र जी एक राजा थे उन्होने शासन किया और चले गए । बाबर एक बादशाह था उसने शासन किया और चला गया । हकनामा की बाबरी मस्जिद से संबंधित पोस्ट पर चल रही बहस पढ़ कर मन मे एक सवाल उठा वह मैं ब्लाग जगत के सभी बुद्धिजीवियों के सामने रख रहा हूँ । बाबर इस देश मे आक्रमणकारी के तौर पर आया वह कब आया और कब तक उसने शासन किया और कब उसकी मृत्यु हुई यह सब ऐतिहासिक तथ्य मैं भी जानता हूँ और आप सब बुद्धिजीवी भी जानते ही होंगे लेकिन श्रीरामचंद्र जी कब पैदा हुए और कब से कब तक उन्होने शासन किया और कब उनकी मृत्यु हुई ये मैं नही जानता मगर यहाँ पर कुछ बुद्धिजीवी ऐसे मौजूद है जो यह भी जानते है कि अयोध्या मे रामचंद्र जी किस जगह पैदा हुए इसलिए वह ऊपर दिए गए सवालो के जवाब भी जानते होंगे । भारत एक धर्म प्रधान देश है धर्म और न्याय एक दूसरे के पूरक है धर्म ही सही न्याय कर सकता है इसलिए सभी न्याय पूर्वक विचार करें । और उपरोक्त सवालो के जवाब दें

मेरा भाई शाहनवाज़- डॉ. अयाज़ अहमद

आज १९ जुलाई है आज मेरी ज़िन्दगी का वह दिन है जो मुझे हमेशा याद रहेगा आज ही के दिन मेरा प्यारा भाई शाहनवाज़ अहमद मुझसे हमेशा के लिए जुदा हो गया था एक साल गुज़रने के बाद और उसका होना जैसे कल ही की बात लगती है . इस एक साल का कोई एक दिन कोई पल ऐसा नहीं गुज़रा जिसमे मैंने उसे याद न किया हो. भी वह अपनी यादों के साथ मेरे दिल के करीब है. हर आदमी की अच्छाइयां ही उसकी यादों के साथ आती है और शाहनवाज़ मे तो बहुत सारी अच्छाइयां थी जो मुझे उसे भूलने नहीं देती और रह रह उसकी याद आती रहती है .हम कुल सात भाई बहन थे जिसमे से दो हम यानि एक मै और दूसरा शाहनवाज़ था और बाकी पांच बहने है ज़िन्दगी बहुत हंसी ख़ुशी के साथ गुज़र रही थी लगता था की ज़िन्दगी बड़ी आसान है कयोंकि मेरी सारी मुश्किलात का हल तो शाहनवाज़ था उसके शब्दकोष मे मेरे काम के लिए न नाम का कोई शब्द नहीं था वोह मुझसे तकरीबन १० साल छोटा था मगर घर या क्लिनिक का कोई भी काम हो ही नहीं सकता था उसकी उम्र तकरीबन २० साल थी लेकिन इस छोटी उम्र मे वह बड़े काम आसानी से कर लेता थामरीजों की खिदमत और दीन की दावत उसका शोक था हर साल देवबंद में लगने वाल…

ईश्वर की निगाह में कौन छोटा है ? कौन बड़ा ?DR. AYAZ AHMAD

ईश्वर ने दुनिया को व्यक्ति के लिए एक परीक्षा के तौर पर बनाया है । वह किसी को कुछ देकर परीक्षा ले रहा है और किसी को न देकर। किसी को एक चीज़ ज्यादा दी है, तो किसी को दूसरी चीज़। जब इंसान किसी चीज़ के मिलने पर ईश्वर का शुक्र अदा करता है और न मिलने पर सब्र करता है, तो वह इस परीक्षा में पास हो जाता है । जब इंसान किसी चीज़ के मिलने पर घमंड और न मिलने पर शिकायत करता है , तो वह इस परीक्षा में नाकामयाब हो जाता है। इंसान को ईश्वर ने बनाया है । इंसान को छोटा या बड़ा समझने की असल कसौटी वही होगी जो ईश्वर ने बताई है और वह है तक़वा (piousness) अर्थात ईश्वर का डर, जो इंसान को नेक बनाता है। जो इंसान ज्यादा नेक है वह ज्यादा अच्छा है और जो कम नेक है वह कम अच्छा है। और जो बिल्कुल नेक नही, वह बुरा है । ईश्वर की निगाह में जो इंसान नेक है वह बड़ा है और जो नेक नही है वह छोटा यानी कमतर है। "वास्तव मे अल्लाह के यहाँ तुम मे सबसे अधिक प्रतिष्ठित वह है , जो तुम में सबसे अधिक (अल्लाह का) डर रखता हो"। (क़ुरआन 49:13)

Suicide आत्महत्या की प्रवृत्ति पर रोकथाम का एकमात्र उपाय है इस्लाम - डॉ अयाज़

आत्महत्या आज का एक मात्र सामाजिक मसला है और आज हजारों लोग रोजाना आत्महत्या करते हैं. आखिर वह अपनी जान क्यों लेते हैं ? और क्या चीज़ उन को इस भयानक क़दम को उठाने पर मजबूर करती है, और वह क्या तरीका है जो उनके क़दम को आत्महत्या की तरफ बढ़ने से रोक सके ? इस विषय पर इस्लामी विद्वान् मौलाना मुहम्मदुल्लाह ख़लीली क़ासमी साहब ने भरपूर रौशनी डाली है. उनका ब्लॉग है: http://deoband.livejournal.com/

ADDRESSING THE MENTALITY OF SUICIDE

Muhammadullah Khalili Qasmi

Suicide, or self-killing, is a global phenomenon and has been known in every culture and society. The taking of one’s own life is the most private of acts. Suicide is the extreme step that a human been decides to put an end to his life. It is not only the result of a mere negative thinking or shallow consideration, but one is compelled to take this ‘extreme step’ only when he finds all the roads blocked and no way out.

The recent years have witnessed an alarming rise in the ratio of suicides across the world. Unlike the previous records, youn…

मानवता को पेश आने वाली किसी भी समस्या के समाधान में क़ुरआन मास्टर की (MASTER KEY) है DR.AYAZ AHMAD

बड़े -बड़े पुस्तक भंडार और बड़े -बड़े पुस्तकालय भी क़ुरआन का बदल नही बन सकती ।दुनिया के बड़े-बड़े बुद्धिजीवी ,दार्शनिक, विचारक , और स्कालर पूरी-पूरी ज़िँदगी खपा कर भी जीवन की जिन समस्याओं एवं गुत्थियोँ को सुलझाने में असफल रह गए , उन्हे क़ुरआन ने केवल शब्दों और एक-एक वाक्य में सुलझा दिया है । मानवता को पेश आने वाली किसी भी समस्या के समाधान में क़ुरआन मास्टर की (MASTER KEY ) है। (अबुल आला मोदूदी- हयात व ख़िदमात)

इस्लाम का अंतिम उद्देश्य दुनिया में सत्य और शांति की स्थापना और आतंकवाद का विरोध है:- स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य

हज़रत मुहम्मद सल्ल. की पवित्र जीवनी पढ़ने के बाद मैने पाया कि आप सल्ल. ने एकेश्वरवाद के सत्य को स्थापित करने के लिए अपार कष्ट झेले। मक्का के क़ाफ़िर सत्य धर्म की राह मे रोड़ा डालने के लिए आप को तथा आपके बताए सत्य पर चलने वाले मुसलमानो को लगातार तेरह साल तक हर तरह प्रताड़ित व अपमानित करते रहे। इस घोर अत्याचार के बाद भी आप सल्ल. ने धैर्य बनाए रखा। यहाँ तक कि आपको अपना वतन मक्का छोड़ मदीना जाना पड़ा। लेकिन मक्का के मुश्ऱिक कुरैश ने आप सल्ल. का व मुसलमानो का पीछा यहाँ भी नही छोड़ा। जब पानी सिर से ऊपर हो गया तो अपनी व मुसलमानो की तथा सत्य की रक्षा के लिए मजबूर होकर आप को लड़ना पड़ा । इस तरह आप पर व मुसलमानो पर लड़ाई थोपी गई। इन्ही परस्थितियोँ मे सत्य की रक्षा के लिए जेहाद (यानी आत्मरक्षा व धर्मरक्षा के लिए धर्मयुद्ध) की आयतेँ और अन्यायी तथा अत्याचारी क़ाफ़िरो और मुश्ऱिको को दंड देने वाली आयतेँ अल्लाह की और से उतरी। पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्ल. द्वारा लड़ी गई लड़ाईयां आक्रमण के लिए न होकर, आक्रमण व आतंकवाद से बचाव के लिए थी, क्योंकि अत्याचारियों के साथ ऐसा किए बि…

इस्लाम ही सबके हक़ पूरे करने का सही रास्ता बताता है

दुनिया मे जितने भी पैग़म्बर (संदेष्टा) उन सब की एक ही आवाज़ थी और वह है हक़ूक़ का पूरा करना , हक़ दो तरह के होते हैं एक अल्लाह के हक़ जैसे इबादत नमाज़ रोज़ा ज़कात वग़ैरा इनका सीधा अल्लाह से संबद्ध है दूसरे हक़ूक़ुलइबाद यानी बंदो के हक़। अल्लाह के जो हक है उन को अदा करने की भी सख्त ताक़ीद की गई है लेकिन इस के बावजूद इस कद्र खतरनाक नही जिस तरह बंदो के हक अदा न करने पर इंसान को बताया गया है ।इसी लिए किसी भी संदेष्टा का तरीका चाहे जो रहा हो पर सारे संदेष्टाओ ने अपनी क़ौमोँ को बंदो के हक की तरफ खास शिक्षा दी है। इबादत रोज़ा नमाज़ ज़कात वगैरा मे कमी रहने पर अल्लाह की रहमत से माफी की उम्मीद है मगर बंदो के हक खा लेने वाले व्यक्ति को माफी की कोई उम्मीद नही है। इसी लिए हज़रत मुहम्मद स.ल.व. ने तमाम मुसलमानो को हिदायत दी कि जो व्यक्ति किसी मुसलमान भाई का जो कोई हक रखता हो और वह हक बुराई करने रुहानी व जिस्मानी नुकसान पहुँचाने का हो या इज़्ज़त का हो या धन से संबंध,किसी का नाहक क़त्ल वगैरा या किसी और चीज़ के बारे मे हो तो उसको चाहिए कि इस हक को आज ही के दिन यानी इस दुनिया मे माफ करा ले इस से…

न्याय कैसे होगा?

पुरस्कार और दंड के लिए आवश्यक है कि अदालत कायम हो, हिसाब किताब हो, लोगो के पक्ष या विपक्ष मे गवाहियाँ दी जाएँ और न्यायधीश इंसाफ़ के साथ फैसला करे, दुनिया मे अगर इंसाफ़ नही होता या लोगो को उनके कर्म का बदला पुरस्कार या सज़ा नही मिलती तो इसके कई कारण है ,अपराधी पकड़ा नही जाता या उसके विरुद्ध गवाह और उसके अपराधो का ठीक ठीक आकलन नही होता रिश्वत ,सिफारिश दबाव आदि से अपराधी बच निकलता है अगर दंड मिल भी जाए तो उसके अपराधो के लिए काफी नही होता। इसी तरह जो लोग दुनिया मे अच्छे काम करते है और उनके कामों का प्रतिफल नही मिलता तो उसके भी कई कारण हो सकते है । लोगो को उनके द्वारा किए गए अच्छे कामों का पता ही न चला यदि चला भी तब भी लोगो के पास वे साधन ही नही हो जिससे वे अच्छे लोगो को उनके कारनामोँ का उचित पुरस्कार दे पाते। परलोक में इनमे से कोई व्यवधान मौजूद नही होगा। प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर की अदालत में अपने अच्छे बुरे कार्यो के साथ उपस्थित होगा । केवल ईश्वर की अदालत मे मानव को अपने किए गए कर्मो का सही प्रतिफल मिलेगा । इसी प्रतिफल का नाम स्वर्ग या नरक है

विश्व पर्यावरण की सुरक्षा इस्लाम ही कर सकता है: प्रिंस चार्ल्स

आक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय मे राजकुमार चार्ल्स ने कहा कि संसार मे global warming रुहानी विश्वास मे कमी के कारण है , इसके लिए सिर्फ बढ़ती आबादी को ही ज़िम्मेदार नही ठहराया जा सकता ।साइंस और टैकनोलोजी को संसार के क़ुदरती निज़ाम की विनाश के लिए गलत प्रयोग किया जा रहा है। पश्चिम का केवल ग्रीन तकनीक की बुनियाद पर पर्यावरण को बेहतर बनाने का दावा गलत है इसके लिए इस्लाम के बताए रुहानी उसूलो को अपनाना होगा। प्रिंस चार्ल्स आक्सफोर्ड इस्लामिक सेंटर जिसके वह 1993 से पैटर्न भी है की 25 वीं वर्ष गाँठ के मौके पर "इस्लाम और पर्यावरण"के विषय पर बोल रहे थे अपने 50 मिनट के भाषण के बीच जिसमे मुस्लिम महिलाएँ, बुद्धिजीवी और कई देशों के राजदूत के अलावा आक्सफ़ोर्ड के मेयर जॉन गैडार्ड भी सुन रहे थे राजकुमार ने बहुत सी क़ुरआनी आयतो का हवाला देते हुए इस दौर के साइंसदानो को बताया कि पर्यावरण को सिर्फ औद्योगिकरण या आबादी ने ही नुकसान नही पहुँचाया वरन् ये इंसान के अंदर की ही गहरी रुहानी मुश्किलात की वजह से है। उन्होने कहा कि संसार को वैश्विक पर्यावरण को बेहतर …

दुनिया को औरत की इज़्ज़त का सबक़ इस्लाम ने दिया

दुनिया को औरत की इज़्ज़त व अहतराम का सबक इस्लाम ने दिया है। हज़रत मुहम्मद स.ल.अ. ने पहली बार इंसानियत को औरतो की अज़मत से वाकिफ कराया दुनिया को सबक़ दिया कि लड़के और लड़कियो की परवरिश मे भेदभाव न करे,लड़कियो को शिक्षा देने का हुक्म दिया। माँ के कदमो के नीचे जन्नत करार दिया। जबकि पश्चिमी सभ्यता ने औरत को सिर्फ ज़िल्लत का और उपभोग का सामान बना दिया औरत को हवस और देखने की चीज़ बना दिया औरत की तरक्की का झंडा बरदार पश्चिम नाज़ुक औरत का लिहाज़ करने के बजाए औरत को मर्द बनाकर बराए नाम तरक्की देना चाहता है। जबकि इस्लाम औरत को कद्र और इज़्ज़त की निगाह से देखने के लिए कहता है। औरतो की वजह से दुनिया मे ज़्यादा बिगाड़ फैले हुए है इसलिए सुधार मे भी औरतो को ज़्यादा बड़ा किरदार अदा करने की ज़रूरत है। अल्लाह ने औरत को कुछ कर गुज़रने की ताकत ज़्यादा दी हुई है अगर औरत अपनी इस ताकत का उपयोग समाज सुधार, गलत रस्मोँ का ख़ात्मा और नैतिकता के बिगाड़ को दूर करने मे करें तो दुनिया मे शांति स्थापित होने से कोई ताकत नही रोक सकती।

गाँधी जी और हज़रत मुहम्मद सल्ल.

गाँधी जी का कथन है। " मुहम्मद साहब (सल्ल.) रुहानी पेशवा थे ब्लकि उन की शिक्षाए को सबसे बेहतर समझता हूँ किसी रुहानी पेशवा ने ईश्वर की बादशाहत का पैग़ाम ऐसा सही और माना जाने वाला नही सुनाया जैसा पैग़म्बर ए इस्लाम मुहम्मद साहब सल्ल. ने सुनाया।"

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।
Greatest concern of Islam is Allah
खुद को जांचिये कि क्या आपका सुप्रीम कन्सर्न अल्लाह है ?
मौलाना ने यह भी बताया कि मेरी दरयाफ़्त ‘इज्ज़‘ है। जब तक आप अपने इज्ज़ को दरयाफ़्त न कर लें तब तक आप न तो आला दर्जे की दुआ कर सकते हैं और न ही आला दर्जे की इबादत कर सकते हैं।इज्ज़ एक गुण है जो घमण्ड का विलोम है।हक़ीक़त तो यही है कि आदमी को चाहिये कि वह अपने आपको जांचता परखता रहे ताकि बेहतरी की तरफ़ उसका सफ़र जारी रह सके।

'दंगे के धंधे की कंपनी' श्रीराम सेना पैसे पर कराती है हिंसा: धर्म और संस्कृति की रक्षा की आड़ में मुतालिक और उसके गुर्गों का असली चेहरा बेनक़ाब

देश में संस्कृति औऱ राष्ट्रीयता के नाम पर जो तोड़फोड़ औऱ हिंसा की तस्वीरें दिखती है उनका सच कुछ औऱ भी हो सकता है. संस्कृति के पहरेदार बनने का दावा करनेवालों का चेहरा कुछ और भी हो सकता है. ये कुछ और कितना भयानक और शर्मनाक हो सकता है इसका पूरा सच आजतक ने तहलका के साथ मिलकर उजागर किया है. जो लोग समाज में मर्यादा को बचाये रखने के लिये मरने मारने का दम भरते हैं उनका असली धंधा क्या है !
मैंगलोर के पब से लड़कियों को बाहर निकाल कर उनके साथ बदसलूकी करने की तस्वीरें आपके दिमाग में आज भी जिंदा होंगी और लड़कियों के साथ ऐसा सलूक करनेवाले संगठन श्रीराम सेना के मुखिया प्रमोद मुतालिक को भी आप नहीं भूले होंगे. मुतालिक की याद हम आपको इसलिये दिला रहे हैं क्योंकि हम उसी मुतालिक के असली चेहरे से रूबरू कराने जा रहे हैं.
धर्म और संस्कृति की रक्षा की आड़ में मुतालिक और उसके गुर्गों का असली चेहरा छिपा है. आजतक और तहलका की टीम ने अपने कैमरे में वो सच कैद किया है जो बताएगा कि मुतालिक राष्ट्रीयता, परंपरा और संस्कृति का पहरादार बनने का जो दावा करता है दरअसल वो एक फरेब है. सच ये है कि धर्म की आड़ में मुतालिक धंधा कर…

माँ -बाप

ईश्वर ने एक जगह पवित्र क़ुरआन मे कहा "अगर माँ बाप मे से कोई एक या दोनो तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच तो उन्हे कोई अप्रिय बात न कहो और न उन्हे झिड़को।" मतलब उन्हे मारना पीटना, भला बुरा कहना, तकलीफ देना तो दूर की बात है, उन्हे कोई ऐसी बात भी कही नही जा सकती,जिसे वे बुरा समझे।अगर वे ऐसी बातें करें जो तुम्हे नापसंद हो तो उन्हे बरदाश्त और गवारा करो और उन्हे झिड़को मत,उनको हर समय खुश रखो

सुरेंदर शर्मा अज्ञात मशहूर किताबें

सरिता व मुक्‍ता इस की संबंधित पत्रिकाओं में समय समय पर हिंदू समाज, प्राचीन भारतीय संसकृति, आर्थिक, सामाजिक तथा पारिवारिक समस्याओं पर प्रकाशित विचारणीय लेखों के रिप्रिंट अब 12 सैटों में उपलब्ध, हर सेट में लगभग 25 लेखपुस्तकः हिंदू समाज के पथभ्रष्टक तुलसीदासहिंदू समाज को पथभ्रष्ट करने वाले इस संत कवि के साहित्यिक आडंबरों की पोल खोलकर उस की वास्तविकता उजागर करना ही इस पुस्तक का उददेश्य हैपुस्तक, रामायणः एक नया दृष्टिकोणप्रचलित लोक धारणा के विपरीत कोई धर्म ग्रंथ न होकर एक साहित्यिक रचना है, इसी तथ्य को आधार मानते हूए रामायण के प्रमुख पात्रों, घटनाओं के बारे में अपना चिंतन प्रस्तुत किया है, रामायण की वास्तविकता को समझने के लिए विशेष पुस्तकपुस्तकः हिंदू इतिहासः हारों की दास्तानप्रचलित लोक धारणा के विपरीत कोई धर्म ग्रंथ न होकर एक साहित्यिक रचना है, इसी तथ्य को आधार मानते हुए रामायण के प्रमुख पात्रों, घटनाओं के बारे में अपना चिंतन प्रस्तुत किया है रामायण की वास्तविकता को समझने के लिए विशेष पुस्तकपुस्तकः क्या बालू की भीत पर खडा है हिंदू धर्म?862 पृष्ठ मूल्य 175 रूपयेपुस्तकः कितने अप्रासंगिक हैं…

अल्लाह के चमत्कार...हर तरफ...!!! Miracle's Of Allah Everywhere

तआला के सिवा कोई पुज्य नही है और अल्लाह तआला को जो करिश्मा दिखाना था वो १४०० saal पहले कुरआन के रुप में सबको दिखा चुकें है लेकिन कुछ लोग है जो अब भी यकीन नहीं करते है ऐसे लोगो की आखें खोलने के लिये अल्लाह तआला ने इस दुनिया के लोगो को बहुत से चमत्कार दिखायें। ऐसी ही कुछ तस्वीरें और एक वीडियो मेरे पास काफ़ी दिनो से मौजुद थी तो मैने सोचा आप लोगो को भी दिखा दूं। अल्लाह तआला चाहे हर चीज़ पर औallaahर हर चीज़ से अपना नाम लिख सकता है चाहे वो बाद्ल में, समुंद्र में, आसमान में, पेड से,....रुकु की हालत में पेडये पेड सिडनी, आस्ट्रेलिया के जंगल में पाया गया था। ये रुकु की हालत में है और इसका रुख काबे की तरह है जिस तरफ़ रुख करकें हर मुसलमान नमाज़ पडता

प्रसिद्ध भारतीय मनोचिकित्सक ने इस्लाम अपनाया

प्रियदर्शन बने अब्दुल्लाह

प्रसिद्ध भारतीय मनोचिकित्सक ने इस्लाम अपनाया यह खबर गुरुवार की है.गवाह बना है अर रियाद का दावत केंद्र.डा. प्रियदर्शन यानी अब्दुल्ला ने शुक्रवार को अरब न्यूज से कहा कि इस्लाम दुनिया का एकमात्र धर्महैजिसके पास सीधे अल्लाह के यहाँ से अवतरित किताब कुर'आन है.उन्होंने कहा कि तुलनात्मक धर्मों के एक छात्र के रूप में उनका का मानना है कि अन्य धर्मों की पुस्तकों परमेश्वर की ओर से मानव जाति के लिए सीधे नहीं अवतरित हुयी हैं .उन्होंने कहा कि पवित्र कुरान उसी प्रारूप और शैली में भी है, जिस प्रकार यह पैगंबर मुहम्मद (सल लल लाहो अलैहे वसल्लम ) को नाज़िल हुई थी .डॉ. अब्दुल्ला लॉस एंजिल्स में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अतिथि प्रोफेसर हैं.उन्होंने एक प्रसिद्ध तमिल फिल्म Karuthamma में अभिनय भी किया है. यह फिल्म भारत के कुछ दूरदराज के गांवों में नवजात शिशु [ लड़कियों] की हत्याओं पर केन्द्रित है.. फिल्म को उसके प्रोडक्शन के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था .
लेखक: talib د عا ؤ ں کا طا لب
लेबल: ,
sabhar hamarianjuman…