Thursday, February 7, 2019

गर्भाशय की सूजन Uterus Swelling


अक्सर लोगों को पेट में दर्द की समस्या होती है। कई बार ये दर्द लाइफस्टाइल में हुए बदलाव, मौसम में बदलाव और गलत-खान-पान के चलते होता है। लेकिन कई बार इस दर्द के पीछे गंभीर रोग भी होता है। लेकिन जानकारी के अभाव में हम उसे समझ नहीं पाते हैं। महिलाओं में कई बार पेट में दर्द बच्चेदानी में सूजन (Uterus Swelling) के कारण भी होता है। जब भी मौसम में बदलाव आता है तो गर्भाशय में सूजन आ जाती है। ऐसे में महिलाओं को असहनीय पेट दर्द, बुखार, सिरदर्द और कमर दर्द का सामना करना पड़ता है। समय रहते इस समसया का इलाज न करने पर यह कैंसर जैसी बड़ी बीमारी का कारण भी बन सकती है। जिसे गर्भाशय फाइब्रॉएड कहते हैं। आज हम आपको गर्भाश्य की सूजन को कम करने के लिए कुछ नुस्खे बता रहे हैं।
गर्भाशय में सूजन के कारण
बदलते मौसम के कारण
अधिक औषधियों के सेवन पर
ज्यादा व्यायाम करने से
भूख से ज्यादा खाना खाने पर
तंग कपड़े पहनना
प्रसव के दौरान सावधानी न बरतना
अधिक यौन संबंध के कारण

लक्षण:
गर्भाशय की सूजन होने पर महिला को पेडू में दर्द और जलन होना सामान्य लक्षण हैं, किसी-किसी को दस्त भी लग सकते हैं तो किसी को दस्त की हाजत जैसी प्रतीत होती है किन्तु दस्त नहीं होता है। किसी को बार-बार मूत्र त्यागने की इच्छा होती है। किसी को बुखार और बुखार के साथ खांसी भी हो जाती है। यदि इस रोग की उत्पन्न होने का कारण शीत लगना हो तो इससे बुखार की तीव्रता बढ़ जाती है।

गर्भाशय की सूजन में विभिन्न औषधियों से चिकित्सा:

1. नीम: नीम, सम्भालू के पत्ते और सोंठ सभी का काढ़ा बनाकर योनि मार्ग (जननांग) में लगाने से गर्भाशय की सूजन नष्ट हो जाती है।

2. पानी: गर्भाशय की सूजन होने पर पेडू़ (नाभि) पर गर्म पानी की बोतल को रखने से लाभ मिलता है।

3. हल्दी: शुद्ध हल्दी, भुना हुआ सुहागा सभी को मकोय के ताजे रस में मिलाकर रूई के फाये को योनि में रखने से गर्भाशय की सूजन समाप्त हो जाती है।

4. एरण्ड: एरण्ड के पत्तों का रस छानकर रूई भिगोकर गर्भाशय के मुंह पर 3-4 दिनों तक रखने से गर्भाशय की सूजन मिट जाती है।

5. बादाम: बादाम रोगन एक चम्मच, शर्बत बनफ्सा 3 चम्मच और खाण्ड पानी में मिलाकर सुबह के समय पीएं तथा बादाम रोगन का एक फोया गर्भाशय के मुंह पर रखें इससे गर्मी के कारण उत्पन्न गर्भाशय की सूजन ठीक हो जाती है।

6. चिरायता: चिरायते के काढ़े से योनि को धोएं और चिरायता को पानी में पीसकर पेडू़ और योनि पर इसका लेप करें इससे सर्दी की वजह से होने वाली गर्भाशय की सूजन नष्ट हो जाती है।

7. बाबूना: बाबूना, गुलकन्द और अफतिमून को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर 300 ग्राम पानी में उबालें जब यह एक चौथाई रह जाए तो इसे छानकर पी लें। बाबूना को पानी में पीसकर एरण्ड के तेल में मिलाकर पेडू़ और योनि पर लेप करें। इससे गर्भाशय की सूजन ठीक हो जाती है।

8. रेवन्दचीनी: रेवन्दचीनी को 15 ग्राम की मात्रा में पीसकर आधा-आधा ग्राम पानी से दिन में तीन बार लेना चाहिए। इससे गर्भाशय की सूजन मिट जाती है।

9. बजूरी शर्बत या दीनार: बजूरी या दीनार को दो चम्मच की मात्रा में एक कप पानी में सोते समय सेवन करना चाहिए। इससे गर्भाशय की सूजन मिट जाती है।

10. कासनी: कासनी की जड़, गुलबनफ्सा और वरियादी 6-6 ग्राम की मात्रा में, गावजवां और तुख्म कसुम 5-5 ग्राम, तथा मुनक्का 6 या 7 को एक साथ बारीक पीसकर उन्हें 250 ग्राम पानी के साथ सुबह-शाम को छानकर पिला देते हैं। यह उपयोग नियमित रूप से आठ-दस दिनों तक करना चाहिए। इससे गर्भाशय की सूजन, रक्तस्राव, श्लैष्मिक स्राव (बलगम, पीव) आदि में पर्याप्त लाभ मिलता है।

11. अशोक: अशोक की छाल 120 ग्राम, वरजटा, काली सारिवा, लाल चन्दन, दारूहल्दी, मंजीठ प्रत्येक को 100-100 ग्राम मात्रा, छोटी इलायची के दाने और चन्द्रपुटी प्रवाल भस्म 50-50 ग्राम, सहस्त्रपुटी अभ्रक भस्म 40 ग्राम, वंग भस्म और लौह भस्म 30-30 ग्राम तथा मकरध्वज गंधक जारित 10 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी औषधियों को कूटछानकर चूर्ण तैयार कर लेते हैं। फिर इसमें क्रमश: खिरेंटी, सेमल की छाल तथा गूलर की छाल के काढ़े में 3-3 दिन खरल करके 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लेते हैं। इसे एक या दो गोली की मात्रा में मिश्रीयुक्त गाय के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। इसे लगभग एक महीने तक सेवन कराने से स्त्रियों के अनेक रोगों में लाभ मिलता है। इससे गर्भाशय की सूजन, जलन, रक्तप्रदर, माहवारी के विभिन्न विकार या प्रसव के बाद होने वाली दुर्बलता इससे नष्ट हो जाती है। 

Tuesday, January 8, 2019

हिजामा हर व्यक्ति को लगावाना चाहिए

hijama guru
फास्ट फूड और मिलावटी चीजों के बढ़ते इस्तेमाल शरीर में बढ़ते विषैले तत्वों को निकालने के लिए हिजामा एक कारगर चिकित्सा है इस  चिकित्सा में शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को प्लास्टिक से निर्मित कप द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है यह पैथी  सिंघी, श्रृंगी या जोंक चिकित्सा का ही  एक आधुनिक रूप है जैसे इन चिकित्सा में शरीर का गंदा खून बाहर निकाल लिया जाता था जिससे मनुष्य स्वस्थ हो जाता था यह चिकित्सा पूरे विश्व मे प्राचीन काल से होती आ रही है इसी चिकित्सा को हिजामा कपिंग थेरेपी के नाम से जानते हैं
इसी चिकित्सा को जब हमारे देवबंद के लहसवाड़ा स्थित इमदादी शिफा खाना हिजामा सेंटर पर सपा नेता हकीम अब्दुल वाहिद कुरेशी ने कराया उन्होंने अपने कुछ अनुभव पेश किए जिसे हम अपने पाठकों के लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं
सपा नेता हकीम अब्दुल वाहिद कुरेशी ने बताया की नंबर एक तो यह हमारे नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है उन्होंने बताया कि मैं अपने घुटनों को लेकर कई साल से परेशान था जिन पर मैं काफी दवाई वगैरा लगा चुका था कुछ समय के लिए आराम मिल जाता था पर पूरा खत्म नहीं हो पा रहा था यह मेरे घुटनों  तकरीबन चार पांच साल पहले चारपाई में घिस  गए थे जो आज तक परेशानी की वजह बने हुए थे इन पर कुछ खाज  रहती थी और जख्म से हो जाते थे मैंने इन पर एक बार ही हिजामा करवाया और एक बार ही में मुझे बहुत ज्यादा आराम हुआ हिजामा में हुए दर्द के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा इसमें कोई भी दर्द मुझे नहीं हुआ हिजामा की मशीन देखकर पहले तो मैं यह समझा था पता नहीं मेरे साथ अब क्या होने वाला है पर जब मुझे उस मशीन से कप लगाए गए तो मुझे इसका कोई पता ही नहीं चला और ना दर्द महसूस हुआ उन्होंने बताया कि यह एक बेहतरीन चिकित्सा है जिसे सभी को कराना चाहिएयह
इटरव्यू आप इस लिंक पर भी देख सकते हैं

Sunday, July 29, 2018

संयम रखें देश बचाएं


देश में इस समय लोग अपना संयम खो रहे हैं इन लोगों में अपने आप को धर्मावलंबी कहने वाले लोग भी हैं इसका सीधा सा अर्थ वह अपने धार्मिक क्रियाकलापों से कुछ सीख नहीं पा रहे हैं और वह लोग भी हैं जो बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं इसके उदाहरण हम टीवी डिबेट में है देख सकते हैं यह सब लाइव चल रहा है जिसमें हम देखते हैं टीवी पर बुद्धिजीवी और धार्मिक लोग बैठे रहते हैं और एक दूसरे को अनाप-शनाप बकते रहते हैं उल्टा सीधा कहते रहते हैं अभी हमने कुछ समय पहले टीवी स्टूडियो में एक डिबेट में एक मुफ्ती साहब को एक महिला पर पिलते  हुए देखा हालांकि पहली गलती महिला की ही है जो कि सुप्रीम कोर्ट में वकील है फ़राह फैज़ नाम है उनका हालांकि उनका नाम सोशल मीडिया पर लक्ष्मी वर्मा भी प्रचारित किया जा रहा है वह हमारे सहारनपुर की ही रहने वाली है किसी वकील से जो कि सुप्रीम कोर्ट की हो ऐसी नहीं की जा सकती कि वह पूरे देश के सामने लाइव शो पर किसी से हाथापाई करेंगे दोनों ही पक्ष मुफ्ती साहब वकील साहब पढ़े-लिखों की श्रेणी में आते हैं वकील भी आमतौर पर कोर्ट में बहस करते हैं अगर वह इसी तरह अपना संयम खो कर एक दूसरे पर पिल पड़े तो कोर्ट का क्या हाल होगा यह कोई भी समझ सकता है इसी प्रकार मुफ्ती एजाज अरशद कासमी की बात है वह का आध्यात्मिक गुरु है और लोगों को धर्म के नाम पर नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं मगर खुद उससे कुछ न सीख पाए और सामने यह भी ख्याल ना रहा कि दूसरी और महिला है और टीवी पर लाइव है इस प्रकार की घटनाएं देश में लगातार बढ़ रही हैं
इसी तरह दूसरी मशहूर घटना मशहूर आए सामाजिक कार्यकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के साथ हुई उन्हें कुछ धर्म रक्षक गुंडों  ने मारपीट कर घायल कर दिया यह शर्मनाक घटना तब हुई जब वह झारखंड के आदिवासी क्षेत्र में थे स्वामी अग्निवेश मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता है उन्होंने अपने संघर्ष से हजारों बंधुआ मजदूरों को आजाद कराया और वह देश में भाईचारा बढ़ाने के लिए सांप्रदायिकता का विरोध करते रहे हैं खास बात यह है वह एक भगवाधारी संत है और उन पर हमला करने वाले लोग भी अपने आप को धर्म रक्षक कहते हैं जो कि धर्म रक्षा के नाम पर अभी तक दूसरे धर्म के लोगों पर हमला कर रहे थे अब अपने धर्म के संतों के भी दुश्मन हो गए हैं इन घटनाओं से भारत को विश्व में न सिर्फ शर्मसार होना पड़ा इन घटनाओं से बचने के लिए भारत के लोगों को सही आध्यात्मिक सोच के साथ धर्म की शरण में जाना पड़ेगा जिससे संयम सीख सके इस तरह की घटनाएं देश को कमजोर करती हैं इसलिए हमें मिल जुलकर इन घटनाओं को रोकना होगा ।

Friday, March 30, 2018

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद एके-47 केस


मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद के एके-47 केस में कोई समानता नहीं है लेकिन हाल ही के लिए गए निर्णयों में जहां मुजफ्फरनगर भीषण दंगो के केस वापस लिए गए वही फल विक्रेता अफजाल की मौत के फलस्वरुप हुए प्रदर्शन मेंsp के गनर की  लूट ली गई एके-47 के केस को दोबारा खोल दिया गया और उसकी जांच एटीएस द्वारा दोबारा की जा रही है
पूरे देश में गुजरात से बड़ा दंगा कहे जाने वाले मुजफ्फरनगर के 2013 के दंगों के भयानक तस्वीरें और जली  झोपड़ियों की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई और विस्थापित दंगा पीड़ितों के आंसू अभी सूखे भी नहीं कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दंगा आरोपियों के 131 मुकदमे वापस लेने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं इन दंगों में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 60 से ज्यादा लोगों की हत्या की जबकि गैर सरकारी तौर पर सैकड़ों में यह तादाद है इसके अलावा 40000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए यह दंगा 2013 में हुआ दंगों के बाद 1455 लोगों के खिलाफ 530 केस दर्ज किए गए तब समाजवादी पार्टी की सरकार थी अब जबकि प्रदेश में बीजेपी सरकार है तब खाप पंचायतों के प्रतिनिधिमंडल के साथ विधायक उमेश मलिक व भाजपा सांसद संजीव बालियान का प्रतिनिधिमंडल 5 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्य योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें 179 केस की लिस्ट सोंपकर जिसमें कि सारे आरोप आरोपी हिंदू थे इन केसों को वापस लेने की मांग की जिसके बाद हरकत में आई सरकार ने मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की
इसके विपरीत देवबंद में 23 अप्रैल 2013 को कथित तौर पर पुलिस द्वारा मारे गए डंडे से अफजाल नामक एक फल विक्रेता की मौत हो गई जिसके प्रतिक्रियास्वरूप मुस्लिम समुदाय के कुछ नौजवानों ने हाईवे पर जाम लगाकर तोड़फोड़ की इसी तोड़फोड़ के दरमियान  तत्कालीनsp के गनर कि एके 47 राइफल भी छीन ली गई बाद में पुलिस क ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगोउको गिरफ्तार करके लूटी गई एके-47 को बरामद करने का प्रयास भी किया इसके बावजूद हिंदू संगठनों के लोग इसमें और गिरफ्तारी की मांग करने लगे तथा एके-47 को बरामद करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने लगे सरकार बदलते ही यह संगठन इस केस की सीबीआई जांच की मांग करते आ रहे थे जिस कारण योगी सरकार ने संज्ञान लेते हुए हैं यह केस एसटीएफ से जांच कराने के निर्देश दिए इस पूरे मामले की जांच कराते ही पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया जिसमें स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए  80 लोगों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट लेकर उनके घर पर नोटिस चस्पा कर दिए गए और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास होने लगे जिसके बाद कोर्ट में मामला जाने की पर फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक है अब जहां सरकार देवबंद एके-47 जैसे छोटे मामले मैं इतनी तत्परता से कार्यवाही कर रही है इसके विपरीत मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपियों के केस वापस ले रही है इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठना जाहिर है इस तरह के मामलों से देश में इंसाफ की उम्मीद धूमल पड़ती है और लोगों में असंतोष फैलता है यह देश के लिए अच्छी बात नहीं सरकार चाहे किसी की भी हो और आरोपियों का धर्म चाहे कोई भी हो कार्रवाई में इंसाफ होना चाहिए

Friday, January 26, 2018

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे हैं जब लव जिहाद नामक शब्द का अविष्कार हुआ तो आम मुसलमान भौंचक्का ही रह गया था उसको तो सपने में भी पता नहीं था इस तरह का भी जिहाद हो सकता है मुसलमानों ने कई साल तक इस लफ्ज़ को झेला और अत्याचार सहे कई मुसलमानों की हत्या भी हुई और पिटाई भी जगह जगह इस नाम पर मुसलमानों के साथ मार पिटाई होना आम सा हो गया है लेकिन मुसलमानों ने फिर भी सब्र से काम लिया सोचा शायद अब इस नाम पर होने वाली राजनीति खत्म हो इसी को लेकर राजस्थान में शंभूलाल नामक व्यक्ति ने एक बंगाली मुस्लिम  अफरोज़ुल को मौत के घाट उतार दिया मुसलमानों ने थोड़े बहुत धरना प्रदर्शन कर फिर चुप्पी साध ली है लेकिन मजहब से नफरत ही नफरत यहीं खत्म ना हुई सांप्रदायिक तत्वों ने एक बार फिर लैंड जिहाद के नाम पर मुसलमानों पर अत्याचार करने की ठान ली इस मामले में मेरठ के इस्माइल गर्ल्स डिग्री कॉलेज के कर्मचारी नसीम इसका पहला शिकार हुए उन्होंने पाई-पाई करके और उनके बेटे नोमान ने कुछ लोन लेकर मेरठ के हिंदू बहुल मोहल्ले  मोरी पाड़ा मैं एक मकान संजीव रस्तोगी से खरीदा जिसको लेकर बाद में हिंदू संगठनों के लोगों ने एक हंगामा खड़ा कर दिया और इसे ही लैंड जिहाद का नाम दिया गया मुसलमानों के हिंदू बहुल मोहल्ले में रहने पर पहले भी एतराज होते रहे हैं लेकिन लैंड जिहाद का यह पहला मामला है इस प्रकार इस्माइल डिग्री कॉलेज के एक छोटे से कर्मचारी नसीम का नाम इतिहास में लिखा जाना चाहिए क्योंकि वह पहले ज्ञात लेंड जेहादी है इस देश के कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति पूरे देश में कहीं भी जायदाद खरीद सकता है लेकिन ऐसा मालूम होता है कि भारत की जमीन मुसलमानों के लिए तंग होती जा रही है कभी कभी मुस्लिम बहुल मोहल्लों को मिनी पाकिस्तान कहने वाले यह लोग अब हिंदू बहुल मोहल्लों को क्या बनाना चाहते हैं यह तो यह संगठन ही जाने लेकिन इस तरह की शब्दावली देश के लिए एक खतरनाक संकेत है हालांकि यह कोशिश पिछले 100 साल से चल रही है और इस पर दशकों से कोशिश होती आ रही है लेकिन हिंदू मुस्लिम को बांटना पिछले एक दशक से ही संभव हो पाया है जो इस तरह की शब्दावली से आगे भी मजबूती से होता रहेगा लेकिन यह देश के लिए खतरनाक संकेत है आज अपने फायदे के लिए देश के सांप्रदायिक सद्भाव को खत्म करने वाली यह पार्टियां संगठन शायद देश का भविष्य नहीं देख पा रही हैं जिसमें देश का सद्भाव खत्म होना लाजमी है आज पाकिस्तान के हालात देखकर हम भली भांति समझ सकते हैं वहां भी इसी तरह की राजनीति हुई थी सांप्रदायिक संगठन वहां भी सरकार में चढ़ बैठे थे आज उस देश पाकिस्तान का हाल बुरा है और वह बटने की कगार पर है भारत देश के लोगों को इस पर फैसला करना ही होगा कि हमारा हाल हमारे देश का हाल पाकिस्तान जैसा ना हो सांप्रदायिक लोगों का काम तो लोगों के बीच से सांप्रदायिक सद्भाव खत्म करना ही होता है लेकिन आज देश के लोगों को सांप्रदायिक लोगों का बहिष्कार करना चाहिए

Thursday, May 4, 2017

सड़क पर न्याय


आज कल सड़क पर न्याय करने की ग्रंथि भारत में खूब विकसित हुई है। इस ग्रन्थि का शिकार अधिकतर अल्पसंख्यक, सरकार के राजनैतिक विरोधी वैचारिक विरोधी अफ्रीकी देशों के काले लोग दूसरे राज्य के मजदूर, दलित व आदिवासी आदि लोग होते हैं।
सड़क पर न्याय करने वाले ज्यादातर संगठित लोग होते हैं, इसके अलावा कभी कभी अंसगठित लोग भी किसी अफवाह या घटना की प्रतिक्रिया में शामिल हो जाते हैं।
देश मंे इस समय बहुत सारे संगठन कुकरमुत्तों की तरह उग गए है। पहले ये संगठन प्रेस विज्ञप्ती से किसी समस्या की निंदा कर लेते थे या फिर धरना ज्ञापन आदि में लगे रहते थे। परन्तु समय के साथ-साथ बाद इन संगठनों ने कानून हाथ में ले लिया और लगे सड़क पर न्याय करने।
 
 हालंाकि इस न्याय व्यवस्था ने इस संगठन का साथ स्थानीय सरकारें भी देती है। क्यांेकि सरकार की ओर से इन संगठनों की कार्यवाही का भय नही होता इसलिए ये संगठन रात दिन तरक्की करते हैं इस समय इस तरह की न्याय व्यवस्था कायम करने वालों के पास सबसे बड़ा मुददा गोहत्या है। इसी मुददे को लेकर सबसे ज्यादा सड़क पर न्याय हो रहा है। और जहां तहां लोग इस का शिकार हो रहे हैं। पिछले  दिनों 6 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इसी मुददे को लेकर इस तरह के संगठनों को चेताया भी था मगर राज्य सरकार की प्रभावी कार्यवाही के अभाव में समस्या कज की जस है।
इस तरह की घटनाओं में आम तौर पर संगठन  अपने न्याय की पूरी वीडियो रिकार्डिंग करते हैं और उसे फिर सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं क्यांेकि उन्हें कानून का तो भय नही है इस तरह के मामलों में पुलिस खानापूर्ति की करती है और सड़क पर न्याय करने वाले साफ छूट जाते है। हालांकि हमारे देश का कानून हर तरह के अपराधी को सजा देने में सक्षम है। लेकिन मुकदमों को बोझ बहुत अधिक है और जजो की संख्या सीमित होने के कारण न्याय मिलने में बहुत ज्यादा देरी हो जाती है। इसके अलावा भ्रष्टाचार अधिक होने के कारण भी सही न्याय नही मिल पाता जिसके कारण समाज में एक जनाक्रोश उत्पन्न होता है।
इसी जनाक्रोश का सहारा लेकर कुछ संगठन खुद ही सड़क पर न्याय करने लग जाते हैं, वह कुछ मुददे ढूढते है जिससे लोग जज्बाती तौर पर जुडे हो ताकि लोग साथ न दे तो विरोध भी न करें।
अब से कुछ समय पहले देश में अगर दंगा होता तो जिस जगह होता वहां के अलावा कहीं और महौल कम खराब होता था लेकिन सड़क पर न्याय करने वालों ने तो अब सभी जगह पर यही माहौल बना दिया है कि जाने कब किसे कहां पीटे और कब हत्या कर दें।
उ0प्र0 राज्य में योगी सरकार के गठन के बाद अल्पसंख्यकों और दलितों में सरकार से बहुत ज्यादा उम्मीदें नही है। सरकार गठन के बाद प्रशासन भी अति उत्साह में है और मुसलमानो के सभी काम वैध और अवैध देखें जा रहे है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी जी के ब्यान इस सब पर मरहम का काम भी करते हैं और फिर भी विश्वास कायम होने और अपने लोगों का संभालने में योगी जी को काफी वक्त लगेगा।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का कहना है कि सरकार किसी के साथ भेदभाव नही करेगी वह धर्म या जाति के आधार पर किसी पर जुल्म नही होने देंगे। और उनकी प्रथमिकता सर्वप्रथम बिना भेदभाव विकास है।
चलो विकास की बात तो अच्छी है परन्तु अल्पसख्यों व दलितों के लिए सबसे बड़ा मुददा सुरक्षा एवं रोजगार है साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों एवं संगठन पर लगाम लगाना जरूरी है जो सड़क पर न्याय कर रहे हैं पुलिस व न्याय व्यवस्था मजबूत हो वह ही दोषियों पर कार्यवाही करें। अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है तो  उस पर पुलिस कार्यवाही करें कानून उसे सजा दे। अगर इसमें भ्रष्टाचार आड़े आ रहा है तो भ्रष्टाचार दूर होने का प्रयास होना चाहिए न कि कानून लोग अपने हाथ में ले और खुद भ्रष्टों वाला व्यवहार करें। एक सभ्य देश मंे इस तरह का व्यवहार शोभा नही देता जहंा इस देश में भारत रत्न भीम राव अम्बेडकर द्वारा रचित मजबूत संविधान है जो हो हमें एक सम्पूर्ण लोकतंत्र का एहसास कराता है। अधूरे लोकतन्त्र वाले पाकिस्तान का हाल हम देख ही रहे हैं। अब जरूरी है कि नही हम भी उसी पाकिस्तान का अनुसरण करें और पाकिस्तान की तरह विफल राष्ट्र साबित हों।



Thursday, March 30, 2017

चुनाव के बाद हालात और हल


यू.पी. चुनाव में मिले भाजपा को प्रचंड बहुमत के कारण आज मुसलमान सकते की हालत में हैं। क्योंकि मुसलमानों ने वोट भाजपा को हराने के लिए दिया था, मगर हुआ उल्टा भाजपा को हराना तो दूर उल्टे यू.पी. विधान सभा में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व भी कम हो गया। उलेमा और बुद्धिजीवियों की सारी अपीलें बेकार हो गई और मुसलमानों का वोट तकरीबन हर मुस्लिम बाहुल सीट पर और अन्य सीटों पर दो जगह या की कहीं कहीं तीन जगह बंट गया।
मुसलमानों की संख्या भारत में 20 प्रतिशत के आस पास है जिसमें पश्चिमी यू0पी0 में तकरीबन 35 प्रतिशत के करीब है। मगर वहां भी मुसलमानों को कोई ज्यादा फायदा नही मिला।
सपा व बसपा दो पार्टियों ने यूपी मंे बारी-बारी सरकार बनाई लेकिन आज की तारीख में सपा के पास मुसलमानों और 5- 7 प्रतिशत यादवों के अलावा कोई दूसरा वोट बैंक नही है। इसी तरह बसपा के पास जाटवों के अलावा कोई वोट बैंक नही बचा। कांग्रेस तो है ही डूबता जाहज़।
मायावती ने पिछली बार अपनी हार का कारण मुसलमानों की गददारी बताया था इस बार वो ईवीएम मशीन को दोष दे रहीं हैं।
सपा व कांग्रेस ने मुसलमानों को दोष नही दिया लेकिन सुगबुगाहट उसमे भी है। लेकिन अगर हम देखें तो मालूम होगा कि सपा ने अपने 5 साल के कार्यकाल में मुसलमानों को कितना दिया है तो मालूम होगा कि सबसे ज्यादा दंगे फसाद और कब्रिस्तान की दीवारें, थोड़े उर्दू टीचर और थोड़ी बहुत पेंशन। प्रदेश में पिछली कुछ सरकारों के मुकाबले इस बार कुछ ज्यादा विकास भी हुआ मगर मुसलमानों की मूल समस्याएं जस की तस ही हैं। मुसलमानों से किया 18 प्रतिशत आरक्षण का वादा तो पूरा हो ही नही सका और न ही जेल में बंद बेकसूर मुसलमान ही छूट सके। फिर भी मुसलमानों ने सपा को अपना भरपूर वोट दिया।
आज भी मुसलमानों के इलाकों में स्कूल कालिज और बैंक से ज्यादा पुलिस चैकी मिलती हंै। लेकिन पक्षपात के नाम पर प्रदेश में हिन्दु वोटों का जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ और भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला। इस कारण मुसलमानों को भी अपना व्यवहार बदलना होगा।
आज जब हम देखते हैं कि आजाद को 70 वर्ष के करीब हो चुके हैं और मुसलमान आज भी उसी हालत में है जो आजादी के समय में था। मुसलमानों ने समय समय पर कांग्रेस को अपना पूरा समर्थन दिया मगर कांग्रेस ने मुसलमानों को न कुछ देना था और न ही कुछ दिया। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट इस बात की गवाह है। कांग्रेस ने बड़े सुनियोजित तरीके से मुसलमानों के खिलाफ काम किया और साम्प्रदायिक तत्वों से डराकर मुसलमानों का वोट भी लेती रही। यही हालत तकरीबन सभी कथित सेक्यूलर दलों की रही। इन दलों ने मुसलमानों को
संघ से डराया और खूब वोट लिया और देश में अधिकतर समय सरकार बनाई।
समय समय पर मुसलमानों को मन्त्रालय भी दिए गये लेकिन सभी मुसलमान मंत्री कठपुतली ही थे और न तो सरकार ने, न मुस्लिम मंत्रियांे ने मुसलमानों के लिए कुछ किया। इस सबसे पता चलता है कि मुसलमानों को किसी राजनैतिक क्रान्ति की जरूरत नही है क्योंकि आज तक राजनीति से कुछ हासिल ही न हो सका। अब मुसलमानों को शैक्षिक आन्दोलन या सामाजिक आन्दोलन की जरूरत है जिससे मुसलमान अपना जीवन स्तर सुधार सकें। मुसलमानों को इतिहास से सबक लेते हुए आगे बढना चाहिए आजादी के आन्दोलन के समय भी अंगे्रजी भाषा और व्यवस्था का बायकाट के कारण मुसलमानों को एक बड़े नुकसान से गुजरना पड़़ा जिसका खामियाजा हम आज तक भुगत रहे हंै। अब हमारी यह कोशिश होनी चाहिए कि हम इतिहास न दोहराए और मोदी सरकार एवं संघ आदि का विरोध न करें। मुसलमानों को राजनीति के अलावा देश में दूसरे मौके ढूढने चाहिए। इसके अलावा मुसलमानों को इस्लाम की सही जानकारी दूसरे धर्म के लोगों को देनी चाहिए ताकि साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा फैलाई गई इस्लाम के प्रति भ्रांतियों को दूर किया जा सके। इन भ्रांतियों के कारण ही हिन्दुओं में मुसलमानों के प्रति नफरत बढ़ रही है और वे मुसलमानों से दूर हो रहे हैं। इस लिए यह आज की सबसे बड़ी जरूरत भी है कि मुसलमान इस्लाम को खुद भी समझे और दूसरे देशवासियों को भी समझाए। इससे आपस में प्यार मुहब्बत भी बढेगा सारी समस्याएं जज्बात में आकर ही हल करने की न साचे, प्यार मोहब्बत बड़़ी चीज है उसी से हल करने का प्रयास करें।
सोर्सपश्चिमी उजाला मासिक

गर्भाशय की सूजन Uterus Swelling

अक्सर लोगों को पेट में दर्द की समस्या होती है। कई बार ये दर्द लाइफस्टाइल में हुए बदलाव, मौसम में बदलाव और गलत-खान-पान के चलते होता है। लेक...